खाकी में भक्ति! सिहावा थाना बना ‘मां खंभेश्वरी धाम’, नवरात्रि में पुलिस ने पेश की अनोखी मिसाल

धमतरी : धमतरी जिले का सिहावा थाना इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है.जहाँ आमतौर पर पुलिस थानों में मुकदमों की फाइलें और सायरन का शोर होता है, वहीं इस थाने की आबोहवा में इन दिनों कपूर की महक और मां खंभेश्वरी देवी के जयकारे गूंज रहे हैं.चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर यहाँ तैनात पुलिसकर्मियों ने अपनी ‘कड़क वर्दी’ के भीतर छिपे ‘कोमल भक्त’ का परिचय देते हुए न केवल 9 दिनों की कठिन साधना की, बल्कि महाअष्टमी पर कन्या पूजन कर मिसाल पेश की.
ब्रिटिश काल का वो ‘ऐतिहासिक’ फैसला
सिहावा थाने का इतिहास जितना पुराना है, उतनी ही गहरी यहाँ की आस्था है। साल 1898 में अंग्रेजों ने जब रेल स्लीपरों के लिए साल की लकड़ियों की तस्करी रोकने हेतु यहाँ थाना बनाया, तब उन्होंने स्थानीय भावनाओं का सम्मान करते हुए परिसर में स्थित मां खंभेश्वरी के मंदिर को यथावत रखा.साल 1903 में जब पक्के थाना भवन का निर्माण हुआ, तब भी मंदिर के स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं की गई। आज 128 साल बाद भी, खाकी वर्दी वाले ही यहाँ के मुख्य सेवादार हैं.
जब जवानों ने पखारे देवी स्वरूपा कन्याओं के पैर
नवरात्रि के दौरान सिहावा थाने का नजारा किसी सिद्ध पीठ जैसा नजर आता है. ड्यूटी के कड़े अनुशासन के बीच पुलिसकर्मी समय निकालकर मंदिर की व्यवस्थाएं संभालते हैं। महाअष्टमी के अवसर पर एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य तब दिखा, जब पुलिस अधिकारियों और जवानों ने पूरी विनम्रता के साथ अपने जूते और बेल्ट त्यागकर जमीन पर बैठकर नव-कन्याओं का पूजन किया.देवी स्वरूपा कन्याओं के पैर पखारकर उन्हें आदरपूर्वक भोजन कराया गया और क्षेत्र की सुख-शांति के लिए हवन कुंड में आहुतियां दी गईं.
भक्ति से मिलता है ‘सुरक्षा’ का संकल्प
क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए यह मंदिर और यहाँ के पुलिसकर्मी अटूट विश्वास का प्रतीक हैं.थाने में तैनात पुलिसकर्मियों का कहना है कि मां का आशीर्वाद उन्हें विषम परिस्थितियों में मानसिक संतुलन बनाए रखने और निष्पक्षता से अपना कर्तव्य निभाने की शक्ति देता है.
यह आयोजन समाज को यह संदेश भी देता है कि पुलिस केवल कानून की रक्षक ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों की भी उतनी ही सम्मानजनक संरक्षक है.











