सुपौल में किसानों के लिए बड़ी पहल! युद्ध स्तर पर बन रही फार्मर आईडी, सरकार देगी सीधे लाभ

सुपौल : किसानों को डिजिटल पहचान दिलाने और उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित फार्मर रजिस्ट्रेशन का कार्य जिले में युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. जिले में अब तक 2900 किसानों का फार्मर रजिस्ट्रेशन आईडी जनरेट किया जा चुका है, जबकि 8700 किसानों का ई-केवाईसी पूर्ण कर लिया गया है. किसानों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग 6 से 9 जनवरी तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है.

जिसके तहत युद्ध स्तर पर फार्मर आईडी बनाने का कार्य किया जा रहा है. इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला कृषि पदाधिकारी पप्पु कुमार ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्रेशन आईडी किसानों के लिए एक यूनिक डिजिटल पहचान होगी. इसके माध्यम से उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ बिना किसी जटिल प्रक्रिया के मिल सकेगा.

इस आईडी के जरिए किसान की भूमि, फसल, बैंक खाता और अन्य आवश्यक जानकारियां एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेंगी. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी. गांव-गांव में शिविर लगाकर किसानों का रजिस्ट्रेशन और ई-केवाईसी किया जा रहा है. इसके अलावा, पंचायत भवन, कृषि कार्यालय और कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से भी किसानों को सुविधा दी जा रही है.

किसानों को बताया जा रहा है कि फार्मर आईडी बनने के बाद प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, बीज अनुदान, कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सहायता जैसी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा. भविष्य में किसी भी नई योजना के लिए अलग-अलग दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. अधिकारियों ने बताया कि ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना फार्मर आईडी जनरेशन के लिए अनिवार्य है. इसके तहत आधार कार्ड को बैंक खाते और मोबाइल नंबर से लिंक किया जा रहा है.

जिले में पीएम-किसान के ढाई लाख के करीब सक्रिय लाभार्थी हैं. आगामी किस्त का लाभ प्राप्त करने हेतु इन सभी लाभुकों को अनिवार्य रूप से फार्मर रजिस्ट्री कैंप में भाग लेकर फार्मर रजिस्ट्री वेब पोर्टल ऐप के माध्यम से बायोमेट्रिक या फेस आथेंटिकेशन द्वारा सत्यापन कराते हुए भूमि संबंधी दावा दर्ज करना होगा. फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया में कृषि विभाग के कर्मियों द्वारा किसानों का ई-केवाईसी किया जा रहा है, जबकि राजस्व विभाग के राजस्व कर्मचारी बकेट सत्यापन का कार्य कर रहे हैं. इस समन्वित प्रयास से फार्मर आईडी निर्माण की प्रक्रिया को गति मिली है.