सूरत में गुजरात गैस की बड़ी लापरवाही: डिपॉजिट भरने के 8 महीने बाद भी 7 हजार कनेक्शन पेंडिंग

केंद्र और राज्य सरकार एक ओर जहां एलपीजी गैस सिलेंडरों की किल्लत से निपटने और पाइप-नेचुरल गैस (PNG) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर कंपनी की सुस्ती के कारण उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सूरत शहर में राज्य सरकार के स्वामित्व वाली प्रमुख कंपनी ‘गुजरात गैस’ की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। शहर में नया PNG कनेक्शन लेने के लिए आवेदन करने और सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करने के बावजूद 7 हजार से ज्यादा नए घरेलू कनेक्शन महीनों से पेंडिंग पड़े हैं।

डिपॉजिट जमा करने के 8 महीने बाद भी रसोई तक नहीं पहुंची गैस

अनेक इलाकों में उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें आवेदन जमा किए और आवश्यक डिपॉजिट राशि भरे 8-8 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनके घर की रसोई तक गैस लाइन नहीं पहुंच सकी है। इस देरी के कारण स्थानीय लोगों और ग्राहकों में कंपनी के प्रति भारी आक्रोश है।

पाइपलाइन बिछी, फिर भी मीटर इंस्टॉलेशन में अड़चन

हैरानी की बात यह है कि सूरत के अधिकांश इलाकों में गुजरात गैस की मुख्य पाइपलाइन पहले से ही उपलब्ध है। कई सोसायटियों और अपार्टमेंट के मुख्य गेट तक गैस लाइन बिछा दी गई है, लेकिन मकान के अंदर आंतरिक पाइपलाइन बिछाने और मीटर लगाने का काम अटका पड़ा है। कंपनी द्वारा ग्राहकों को कनेक्शन पूरा होने की कोई निश्चित समय- सीमा भी नहीं बताई जा रही है।

स्टाफ की कमी बनी बड़ी वजह

इस पूरे मामले पर गुजरात गैस के अधिकारियों का तर्क है कि कंपनी के पास कर्मचारियों (स्टाफ) की भारी कमी है। कंपनी आमतौर पर एक साल में लगभग 3 हजार नए कनेक्शन देती है। हालांकि, युद्ध की स्थिति के दौरान जब रसोई गैस की किल्लत की आशंका बढ़ी, तब अकेले एक ही महीने में 9 हजार से अधिक लोगों ने नए कनेक्शन के लिए आवेदन कर दिया था। स्टाफ की सीमित संख्या के कारण आवेदनों का यह बैकलाग लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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