ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या पर बड़ा खुलासा, सऊदी क्राउन प्रिंस की भूमिका का दावा

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या को लेकर अमेरिकी मीडिया में चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस ऑपरेशन की टाइमिंग और रणनीति के पीछे सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अहम भूमिका हो सकती है। हालांकि इन दावों पर सऊदी अरब की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने कथित तौर पर उस समय कार्रवाई की जब खामेनेई अपने करीबी सहयोगियों अली शमखानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) प्रमुख मोहम्मद पाकपूर के साथ बैठक में थे। बताया गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस कार्रवाई के पक्ष में नहीं थीं, लेकिन सऊदी नेतृत्व की ओर से इसे सही समय बताते हुए दबाव बनाया गया।
अमेरिकी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी, उसी दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस ने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कई बार संपर्क किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्राउन प्रिंस ने तर्क दिया कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में ईरान और मजबूत हो जाएगा, जिससे क्षेत्रीय संतुलन सऊदी अरब के खिलाफ जा सकता है।
एक अन्य रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच व्हाइट हाउस का दौरा किया था और वहां अमेरिकी अधिकारियों के साथ संभावित कार्रवाई पर चर्चा की थी। हालांकि इन बैठकों का आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
मध्य पूर्व में सऊदी अरब और ईरान के बीच दशकों पुरानी प्रतिद्वंद्विता रही है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान सऊदी अरब ने इराक का समर्थन किया था। 1988 में हज के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में और तल्खी आ गई थी।
क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दोनों देशों के बीच यमन, लेबनान और सीरिया जैसे देशों में अप्रत्यक्ष टकराव भी देखने को मिला है। विश्लेषकों का मानना है कि तेल व्यापार, धार्मिक नेतृत्व और भू-राजनीतिक वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा ने इस तनाव को और गहरा किया है।
फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और विभिन्न देशों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है।











