डूंगरपुर: गोवाड़ी से जेठाणा तक मौत का बाईपास, बीते एक माह में चार हादसों में तीन की मौत; 8 लोग हुए घायल

डूंगरपुर-बांसवाड़ा नेशनल हाईवे 927-ए इन दिनों हादसों का हाईवे बनता जा रहा है. पिछले कुछ दिनों में सागवाड़ा बायपास, हडमाला मोड़, लीमड़ी और गोवाड़ी के समीप हुई चार बड़ी सड़क दुर्घटनाओं ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है. जिसके बाद नेशनल हाईवे 927-ए पर गोवाड़ी ब्रिज से लेकर जेठाणा ब्रिज तक का हिस्सा अब मौत के बाईपास के रूप में कुख्यात हो चुका है.
बीते कुछ दिनों में हुई एक के बाद एक दर्दनाक मौतों और करीब आधा दर्जन लोगों के गंभीर रूप से घायल होने के बाद स्थानीय जनता का धैर्य जवाब दे गया है. इस खूनी खेल को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त उबाल देखा जा रहा है, जहाँ लोग प्रशासन की सुस्ती और एनएचएआई की लापरवाही पर कड़े सवाल दाग रहे हैं.
ब्लैक स्पॉट बनते जा रहे हाईवे के ये चार मोड़
बीते दिनों इंदौर से माउंट आबू घूमने निकले चार दोस्तों की कार हडमाला मोड़ पर सड़क किनारे खड़ी एक पिकअप से जा टकराई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई. वहीं, गोवाड़ी के पास पीछे से आती तेज रफ्तार कार ने एक टेम्पो को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे देराणी-जेठानी की मौके पर ही मौत हो गई. सड़क हादसों का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा. लीमड़ी मोड़ पर एक तेज रफ्तार कार ने शादी समारोह में जा रहे बाइक सवार एक युवक और दो महिलाओं को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए. वहीं, वगेरी मोड़ पर दो कारों की आमने-सामने की भिड़ंत ने हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सोशल मीडिया पर उठी बदलाव की गूँज
लोगों ने व्हाट्सएप और फेसबुक ग्रुप्स पर जनहित के मुद्दों ने तूल पकड़ लिया. सैकड़ों लोगों ने एक सुर में गोवाड़ी-जेठाणा मार्ग की असुरक्षित इंजीनियरिंग को आड़े हाथों लिया. ग्रुप के सदस्यों का कहना है कि प्रशासन केवल हादसों के बाद पोस्टमार्टम की औपचारिकता निभाता है, जबकि धरातल पर सुरक्षा के नाम पर एक पत्थर भी नहीं हिलाया गया. लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरकर चक्काजाम करने को मजबूर होगी.
लिमड़ी मोड़ पर ब्रिज की पुरजोर मांग
इस पूरे विवाद और आक्रोश के केंद्र में लिमड़ी मोड़ है. स्थानीय ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों का तर्क है कि लिमड़ी मोड़ पर जिस तरह से ट्रैफिक का दबाव है और जिस रफ्तार से वाहन गुजरते हैं, वहां एक फ्लाईओवर या ब्रिज बनाना ही एकमात्र स्थायी समाधान है. आए दिन हो रहे हादसों में यहाँ कई परिवार उजड़ चुके हैं. लोगों का कहना है कि छोटे-मोटे स्पीड ब्रेकर या संकेतक अब नाकाफी साबित हो रहे हैं, जब तक यहाँ ब्रिज का निर्माण नहीं होगा, तब तक बेकसूरों की जान जाना बंद नहीं होगा.
प्रशासन मौन, जनता की जान जोखिम में!
जनता का आक्रोश केवल हादसों तक सीमित नहीं है, बल्कि उस कार्यप्रणाली पर भी है जो दुर्घटनाओं को निमंत्रण देती है. हाईवे पर स्थित कट्स और मोड़ पर संकेतक बोर्ड की कमी और चालकों द्वारा मोड़ पर गति धीमी न करना सबसे घातक साबित हो रहा है. इसके अलावा, नेशनल हाईवे के किनारे वाहनों का अवैध रूप से खड़ा होना भी मोड़ पर दृश्यता को कम कर देता है. वहीं, गोवाड़ी से जेठाणा के बीच रात के समय रोड लाइट बंद होने एवं सड़क किनारे खड़े भारी वाहन हादसों का कारण बन रहे हैं. पुलिस प्रशासन इन पर कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंदे बैठा है. इसके अलावा खतरनाक मोड़ों और कट्स पर न तो रेडियम बोर्ड हैं और न ही पर्याप्त रोशनी, जिससे बाहरी चालक भ्रमित होकर हादसों का शिकार हो रहे हैं. आए दिन हो रही मौतों के बावजूद एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी विभाग की चुप्पी समझ से परे है.
आखिर कब रुकेंगे हादसे?
गोवाड़ी से जेठाणा तक का सफर अब डर का पर्याय बन गया है. सोशल मीडिया पर छिड़ी यह बहस अब एक जन-आंदोलन का रूप लेती दिख रही है. लोग मांग कर रहे हैं कि जिला कलेक्टर और संबंधित विभाग तुरंत इस ब्लैक स्ट्रेच का निरीक्षण करें और लिमड़ी पर ब्रिज निर्माण के प्रस्ताव को प्राथमिकता से आगे बढ़ाएं.











