मोतियाबिंद ऑपरेशन…कांग्रेस जांच टीम का अस्पताल-प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप:सावित्री मंडावी बोलीं

बीजापुर जिला अस्पताल में सर्जरी के कुछ दिन बाद 9 मरीजों के आंखों की रोशनी कम हो गई थी। इस मामले की जांच के लिए कांग्रेस की 6 सदस्य जांच टीम बीजापुर पहुंची। कमेटी ने रविवार को प्रभावित मरीजों के परिजनों और जिला अस्पताल के डॉक्टरों से जानकारी ली।

इसके बाद जिला मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। कांग्रेस ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। जांच कमेटी की संयोजक और विधायक सावित्री मंडावी ने ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से बस्तर के आदिवासियों का लगातार शोषण हो रहा है।

विधायक सावित्री मंडावी ने बताया कि मरीजों को 23 नवंबर को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था और 24 नवंबर को उनका ऑपरेशन हुआ। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान परिजनों को न तो कोई सूचना दी गई और न ही उन्हें मरीजों से मिलने दिया जा रहा है। ऑपरेशन के बाद मरीजों की उचित देखभाल नहीं की गई और उन्हें जल्दबाजी में घर भेज दिया गया, जिससे संक्रमण और बढ़ गया।

अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप

विधायक ने कहा कि हालत बिगड़ने पर उन्हें रायपुर रेफर किया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने इसे अस्पताल प्रबंधन की सीधी लापरवाही बताया। सावित्री मंडावी ने आरोप लगाया कि भाजपा की डबल इंजन सरकार बनने के बाद से बस्तर के आदिवासियों का लगातार शोषण हो रहा है।

स्वास्थ्य से किया जा रहा खिलवाड़

उन्होंने कहा कि कभी उन्हें जेल भेजा जाता है, कभी जमीन छीनी जाती है और अब उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर आंखों की रोशनी छीनने की कोशिश की जा रही है। इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद सरकार और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी, जो दर्शाता है कि जिले की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बदहाल हैं।

विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि एक तीन सदस्यीय सरकारी जांच दल चुपके से आकर चला गया, लेकिन न तो कोई जवाब दिया गया और न ही किसी पर कोई कार्रवाई की गई।

24 अक्टूबर और 8 नवंबर को हुआ था ऑपरेशन

दरअसल, 8 मरीजों का ऑपरेशन 24 अक्टूबर को किया गया था, वहीं एक मरीज का ऑपरेशन 8 नवंबर को हुआ है। रोशनी कम होने के बाद मरीज दोबारा बीजापुर जिला अस्पताल पहुंचे। इसकी जानकारी प्रशासन को दी। इसके बाद आनन-फानन में सभी को मेकाहारा लाया गया।

जिनकी आंखों की रोशनी कम हुई है, उनमें बीजापुर के तर्रेम निवासी अवलम डोग्गा (56), टीमापुर की पुनेम जिम्मो (62), मडियम मासे (67), तर्रेम की अलवम कोवे (52), टीमापुर की अलवम पोज्जे (70), बुधनी डोढ़ी (60), पदम शन्ता (54), टिमीदी की पेड्डू लक्ष्मी (62) और तर्रेम का अलवम सोमे (70) शामिल है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

बता दें कि एक साल पहले भी दंतेवाड़ा में मोतियाबिंद के गलत ऑपरेशन से 10 आदिवासी बुजुर्गों को दिखना बंद हो गया था। उन्हें रायपुर के अंबेडकर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इस मामले में सर्जरी करने वाली डॉ गीता नेताम, ममता वेदे स्टाफ नर्स और दीप्ति टोप्पो नेत्र सहायक अधिकारी को सस्पेंड किया गया था।

close