सेंट्रल डेप्युटेशन Vs ट्रांसफर… राष्ट्रपति के अनादर मामले में दार्जिलिंग DM पर केंद्र और ममता में घमासान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बंगाल दौरा से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मुू के अनादर के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच घमासान तेज हो गया है. केंद्र ने राज्य को चिट्ठी लिखकर दो अधिकारियों को डेप्युटेशन पर भेजने की मांग की. केंद्र ने प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप में दार्जिलिंग के DM मनीष मिश्रा और सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के CP के लिए सेंट्रल डेप्युटेशन की मांग की है. दार्जिलिंग के DM मनीष मिश्रा राष्ट्रपति के दौरे के इंचार्ज थे.

केंद्र ने तीन दिन के अंदर डेप्युटेशन पर जाने के लिए लेटर लिखा है. लेटर कल भेजा गया था. इस बीच, ममता बनर्जी की सरकार ने दार्जिलिंग के डीएम मनीश मिश्रा का ट्रांसफर कर दिया है. मनीष मिश्रा को होम डिपार्टमेंट में स्पेशल सेक्रेटरी अपॉइंट किया गया. उनकी जगह सुनील अग्रवाल को दार्जिलिंग का डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है.

केंद्र के एक्शन के बाद ममता का पलटवार

चू्ंकि राष्ट्रपति देश की संवैधानिक प्रधान होती हैं. इसलिए अगर उनकी सिक्योरिटी या प्रोटोकॉल में कोई लापरवाही होती है, तो केंद्र राज्य सरकार को बताए बिना उन्हें सेंट्रल डेप्युटेशन पर हटा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने IPS (कैडर) रूल्स, 1954 के रूल 6(1) की वैलिडिटी कन्फर्म की है.

इस रूल के मुताबिक, अगर जरूरी हो तो केंद्र IPS ऑफिसर्स के ट्रांसफर और डेप्युटेशन पर राज्य के फैसले को ओवरराइड कर सकता है. अब अगर कोई राज्य सरकार किसी चुने हुए ऑफिसर को सेंट्रल डेप्युटेशन पर भेजने से मना करती है, तो उस ऑफिसर को 5 साल के लिए सेंट्रल डेप्युटेशन से बैन किया जा सकता है.

2011 बैच या उसके बाद के IPS ऑफिसर्स के लिए कम से कम 2 साल का सेंट्रल डेप्युटेशन जरूरी है, नहीं तो वे इंस्पेक्टर जनरल के तौर पर एम्पैनलमेंट के लिए एलिजिबल नहीं होंगे.

तृमूल ने राष्ट्रपति से मिलने मांगा समय

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को राज्य के ट्राइबल डेवलपमेंट का ‘रिपोर्ट कार्ड’ पेश करना चाहती है, लेकिन अपॉइंटमेंट नहीं मिल रहा है.

तृणमूल सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल के सांसदों ने पहली चिट्ठी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी थी, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आदिवासी समुदाय के लिए किए गए कामों पर रिपोर्ट देने के लिए समय मांगा गया था, लेकिन पिछले गुरुवार को राष्ट्रपति भवन ने उनकी रिक्वेस्ट खारिज कर दी. खबर है कि राष्ट्रपति फिलहाल इस मीटिंग के लिए समय नहीं दे पा रहे हैं।

इसके बाद तृणमूल ने फिर से राष्ट्रपति भवन को चिट्ठी भेजी है. राज्य की सत्ताधारी पार्टी के सांसदों ने उनसे दूसरी बार समय मांगा है. न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार उस चिट्ठी में 12 से 15 तृणमूल प्रतिनिधियों के साथ राष्ट्रपति से मिलने की रिक्वेस्ट की गई है, लेकिन राष्ट्रपति भवन ने अभी तक उस रिक्वेस्ट का जवाब नहीं दिया है. सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल अगले हफ्ते रायसीना हिल्स को एक और, तीसरी चिट्ठी भेजने वाली है.

जानें क्या है विवाद

राष्ट्रपति पिछले शनिवार को इंटरनेशनल ट्राइबल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने बंगाल आई थीं. सिलीगुड़ी के बिधाननगर में जहां उनका इवेंट होना था, वह जगह बदल दी गई थी. सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति का इवेंट बागडोगरा के पास गोंसाईपुर में ऑर्गनाइज किया गया था. खुद राष्ट्रपति ने इस पर अपना गुस्सा जाहिर किया. बाद में, बिधाननगर पहुंचने पर उन्होंने कहा, “मैं इसी इलाके में मीटिंग करना चाहती थी. यहां काफी जगह है, लेकिन राज्य सरकार ने मुझे मीटिंग करने की इजाजत क्यों नहीं दी?”

इसके तुरंत बाद, राष्ट्रपति मुर्मू ने मुख्यमंत्री को अपनी “छोटी बहन” कहा और कहा, “शायद वह किसी वजह से मुझसे नाराज हैं. इसीलिए उन्होंने मुझे मीटिंग करने की इजाजत नहीं दी.” इसे लेकर जोरदार हंगामा शुरू हो गया. बीजेपी ने यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रपति की “बेइज़्ज़ती” की गई. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे केंद्रीय नेता और मंत्री ने राष्ट्रपति का अनादर करने का आरोप टीएमसी सरकार पर लगाया.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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