CG हाईकोर्ट का 65 अभ्यर्थियों को झटका, कृषि शिक्षक भर्ती में B.Ed से छूट की मांग खारिज, कोर्ट बोला- पात्रता बदलना सरकार का अधिकार

बिलासपुर, 22 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कृषि शिक्षक भर्ती में B.Ed की अनिवार्य योग्यता से एक बार की छूट मांगने वाले 65 अभ्यर्थियों को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और भर्ती की पात्रता तय करना राज्य सरकार और नियम बनाने वाली संस्था के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत अपनी ओर से निर्धारित योग्यता में छूट नहीं दे सकती।

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत ने अभ्यर्थियों की याचिका प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दी। अभ्यर्थियों का तर्क था कि वर्ष 2019 में कृषि शिक्षक के पद के लिए B.Ed अनिवार्य नहीं था और वे उसी समय लागू पात्रता के आधार पर भर्ती के लिए योग्य थे।

2019 में B.Ed अनिवार्य नहीं था

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वर्ष 2019 में कृषि शिक्षक पद के लिए B.Ed की अनिवार्यता नहीं थी। बाद में अशोकानंद पटेल व अन्य बनाम राज्य शासन मामले में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 5 फरवरी 2025 को कृषि शिक्षकों को B.Ed से मिली छूट को असंवैधानिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित कर दिया था।

इसके बाद राज्य शासन ने 13 फरवरी 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर कृषि शिक्षक पद के लिए B.Ed को अनिवार्य योग्यता बना दिया।

भर्ती में एक बार की छूट की थी मांग

65 अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि मौजूदा भर्ती में उन्हें B.Ed के बिना आवेदन करने और परीक्षा में शामिल होने की एक बार की संक्रमणकालीन छूट दी जाए। उनका कहना था कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद उन्हें B.Ed की योग्यता हासिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।

कृषि शिक्षक भर्ती का संक्षिप्त विज्ञापन 28 जुलाई 2026 को जारी हुआ है और आवेदन की अंतिम तारीख 2 सितंबर 2026 निर्धारित है। अभ्यर्थियों ने प्रस्ताव दिया था कि चयन होने पर उन्हें निर्धारित समय सीमा में B.Ed पूरा करने की शर्त लगाई जा सकती है।

हाई कोर्ट ने पुरानी छूट को बताया असंवैधानिक

हाई कोर्ट ने कहा कि डिवीजन बेंच पहले ही वर्ष 2019 के नियमों में कृषि शिक्षकों के लिए B.Ed/DEd/TET की छूट को असंवैधानिक घोषित कर चुकी है। साथ ही राज्य सरकार को NCTE विनियम, 2014 के अनुरूप B.Ed योग्यता शामिल करने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने माना कि मौजूदा नियमों में निर्धारित योग्यता के बिना अभ्यर्थियों को भर्ती में शामिल करने की अनुमति देना न्यायिक रूप से पात्रता में नया अपवाद बनाने के समान होगा।

कोर्ट ने कहा- सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है पात्रता

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने कहा कि भर्ती के लिए पात्रता मानदंड, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और सेवा नियम निर्धारित करना राज्य सरकार या नियम बनाने वाली संस्था का अधिकार है। अदालत अपनी राय को सरकार के निर्णय के स्थान पर नहीं रख सकती और व्यक्तिगत अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए अनिवार्य भर्ती मानदंड में छूट नहीं दे सकती।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा का दायरा यह जांचने तक सीमित है कि सरकार का निर्णय मनमाना, दुर्भावनापूर्ण या असंवैधानिक तो नहीं है। अदालत स्वयं नई पात्रता या छूट निर्धारित नहीं कर सकती।

इस फैसले के बाद कृषि शिक्षक भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए B.Ed की अनिवार्य योग्यता बरकरार रहेगी और बिना निर्धारित योग्यता के आवेदन की मांग को कोर्ट से राहत नहीं मिली है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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