चिदंबरम ने आम बजट को बताया विफल, आर्थिक रणनीति पर उठाए सवाल; गिनाईं 10 चुनौतियां

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (1 फरवरी) को लोकसभा में आम बजट पेश किया. केंद्र सरकार जहां बजट की सराहना कर रही है, तो वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे निराशाजनक करार देते हुए इसकी आलोचना की. कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने बजट को लेकर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि जिसने भी आज बजट को सुना होगा वो हैरान रह गया होगा.
बजट के बाद कांग्रेस नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस, जिसमें पी.चिदंबरम और जयराम रमेश मौजूद थे. इस दौरान चिदंबरम ने बजट को आर्थिक रणनीति और नेतृत्व दोनों के स्तर पर विफल करार दिया. उन्होंने कहा कि बजट केवल वार्षिक राजस्व और व्यय का बयान भर नहीं होता. मौजूदा परिस्थितियों में बजट भाषण को उन प्रमुख चुनौतियों पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण पेश करना चाहिए, जिनका ज़िक्र कुछ दिन पहले जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में किया गया था.
चिदंबरम का सरकार पर हमला
उन्होंने कहा कि मुझे संदेह है कि सरकार और वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ा भी है या नहीं. उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने पढ़ा है, तो ऐसा लगता है कि उन्होंने उसे पूरी तरह से दरकिनार करने का फैसला कर लिया है और अपने पसंदीदा शौक पर लौट आए हैं- लोगों पर शब्दों की बौछार करना, आमतौर पर एक्रोनीम्स के जरिए.
गिनाईं 10 चुनौतियां
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वो कम से कम 10 ऐसी चुनौतियां गिना सकते हैं, जिन्हें आर्थिक सर्वेक्षण और कई जानकार विशेषज्ञों ने चिन्हित किया है-
1-संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक टैरिफ, जिन्होंने निर्माताओं, विशेष रूप से निर्यातकों, के लिए दबाव पैदा किया है. 2- लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संघर्ष, जो निवेश पर बोझ डालेंगे. 3- बढ़ता हुआ व्यापार घाटा, विशेष रूप से चीन के साथ. 4- सकल स्थिर पूंजी निर्माण (लगभग 30 प्रतिशत) का कम स्तर और निजी क्षेत्र की निवेश करने में हिचकिचाहट. 5- भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रवाह को लेकर अनिश्चित दृष्टिकोण और पिछले कई महीनों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का लगातार बाहर जाना. 6- राजकोषीय समेकन (fiscal consolidation) की बेहद धीमी गति और FRBM के विपरीत लगातार ऊंचा राजकोषीय घाटा और राजस्व घाटा. 7- आधिकारिक रूप से घोषित मुद्रास्फीति के आंकड़ों और घरेलू खर्च, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन के वास्तविक बिलों के बीच लगातार बना रहने वाला अंतर. 8- लाखों MSMEs का बंद होना और बचे हुए MSMEs का अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष. 9- रोजगार की अस्थिर स्थिति, विशेष रूप से युवाओं में बेरोजगारी. 10- बढ़ता शहरीकरण और शहरी क्षेत्रों (नगर पालिकाओं और नगर निगमों) में बिगड़ता बुनियादी ढांचा.
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि इनमें से किसी भी मुद्दे को वित्त मंत्री के भाषण में संबोधित नहीं किया गया. इसलिए यह आश्चर्यजनक नहीं था कि तालियां औपचारिक-सी थीं और अधिकांश श्रोता बहुत जल्दी ध्यान हटाकर अलग हो गए.
उन्होंने कहा कि एक अकाउंटेंट के मानकों से भी देखें तो 2025-26 में वित्त प्रबंधन का यह एक बेहद खराब लेखा-जोखा था. उन्होंने कहा कि राजस्व प्राप्तियां 78,086 करोड़ रुपए कम रहीं, कुल व्यय 1,00,503 करोड़ रुपए कम रहा. उन्होंने कहा कि राजस्व व्यय 75,168 करोड़ रुपए कम रहा और पूंजीगत व्यय में 1,44,376 करोड़ रुपए की कटौती की गई (केंद्र 25,335 करोड़ रुपए और राज्य 1,19,041 करोड़ रुपए). उन्होंने कहा कि इस दयनीय प्रदर्शन की व्याख्या करने के लिए एक शब्द तक नहीं कहा गया. उन्होंने कहा कि वास्तव में, केंद्र का पूंजीगत व्यय 2024-25 में GDP के 3.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 3.1 प्रतिशत रह गया है.











