विधानसभा में नकटी गांव पर घमासान: कांग्रेस का स्थगन प्रस्ताव खारिज, सत्ता-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक

रायपुर, 15 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन नकटी गांव में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन सरकार का पक्ष सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव को अग्राह्य (अस्वीकार) कर दिया। इसके बाद सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि नकटी गांव में प्रशासन ने संविधान की भावना के विपरीत गरीबों के मकानों पर बुलडोजर चलाया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई पहले कभी नहीं हुई और सरकार गरीबों के अधिकारों का हनन कर रही है।
कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि कार्रवाई चार महीने बाद होती तो कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन मानसून के बीच लोगों को बेघर करना अमानवीय है। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के 13 मकान तोड़े गए, जबकि चार गायों की भी मौत हो गई।
विधायक देवेंद्र यादव ने भी सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई सुनियोजित तरीके से की गई और प्रशासन ने मानवीय संवेदनाओं की पूरी तरह अनदेखी की।
सरकार ने बताया वैधानिक और संवैधानिक कार्रवाई
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि नकटी गांव में कार्रवाई शिकायतों के आधार पर की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया और पूरी कार्रवाई वैधानिक एवं संवैधानिक दायरे में की गई है। सरकार ने विपक्ष के सभी आरोपों को निराधार बताया।
सरकार का पक्ष सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य घोषित कर दिया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही निर्धारित एजेंडे के अनुसार आगे बढ़ी।
भाजपा का कांग्रेस पर पलटवार
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष जनता को गुमराह कर सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस आज सवाल उठा रही है, उसकी प्रक्रिया उनकी ही सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी।
सियासी मुद्दा बना नकटी गांव
नकटी गांव का मामला अब विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे गरीबों के अधिकारों और संविधान पर हमला बता रही है, जबकि भाजपा सरकार का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा सदन के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।











