कोयला खदान विवाद ने लिया हिंसक रूप, सरपंच की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस-ग्रामीणों में झड़प, DSP समेत 26 घायल

सूरजपुर जिले के प्रतापपुर क्षेत्र के मदननगर गांव में प्रस्तावित एसईसीएल कोयला खदान के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध शुक्रवार को हिंसक हो गया। हत्या के प्रयास के एक पुराने मामले में खदान विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सरपंच बाबूलाल पोया समेत चार ग्रामीणों की गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस और ग्रामीणों के बीच जमकर झड़प हुई। इस दौरान पथराव और लाठी-डंडों से हुए हमले में डीएसपी सहित 26 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस के वाहनों और बसों में भी तोड़फोड़ की गई।

जानकारी के अनुसार, पुलिस बल ने गांव को चारों ओर से घेर लिया था, जबकि ग्रामीण तीर-धनुष, लाठी-डंडे और पारंपरिक हथियारों के साथ विरोध में डटे रहे। घटना के बाद ग्रामीणों ने अंबिकापुर-प्रतापपुर मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया, जिससे देर शाम तक यातायात प्रभावित रहा।

कार्रवाई के लिए एसईसीएल की ओर से 10 बसों की व्यवस्था की गई थी, जिनमें करीब 700 पुलिस जवान गांव पहुंचे थे। झड़प के दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने दो बसों को क्षतिग्रस्त कर दिया। बताया गया कि ये बसें निजी बस ऑपरेटरों की थीं।

हालात बिगड़ने पर कलेक्टर रेना जमील और पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने मदननगर से करीब दो किलोमीटर दूर धरमपुर स्कूल परिसर में अस्थायी कैंप बनाकर पूरे घटनाक्रम की निगरानी की। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद देर शाम तक क्षेत्र में तनाव बना रहा।

गौरतलब है कि ग्राम पंचायत चौरा, कनकनगर, मदननगर और जगन्नाथपुर के लगभग 18 किलोमीटर क्षेत्र में एसईसीएल की ओपनकास्ट कोयला खदान प्रस्तावित है। ग्रामीण पिछले तीन वर्षों से इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे खदान के नहीं, बल्कि मौजूदा विस्थापन नीति के विरोधी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें जमीन का उचित मुआवजा और प्रभावित परिवारों को रोजगार नहीं मिला है, इसलिए वे नकद मुआवजे के बजाय जमीन के बदले जमीन की मांग कर रहे हैं।

पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस टीम केवल पुराने मामलों के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए गांव गई थी। खदान परियोजना या सर्वेक्षण से पुलिस का कोई संबंध नहीं था। आरोपियों को पकड़ने के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर हमला कर दिया। उन्होंने बताया कि सरपंच के बेटे को एक मामले में गिरफ्तार किया गया है तथा कई आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं।

वहीं कलेक्टर रेना जमील ने कहा कि आरोपियों को पिछले तीन महीने से नोटिस जारी किए जा रहे थे, लेकिन वे पेश नहीं हो रहे थे। पुलिस जब कार्रवाई के लिए पहुंची तो ग्रामीणों ने विरोध करते हुए हमला कर दिया। प्रशासन ने ग्रामीण प्रतिनिधियों से बातचीत कर स्थिति सामान्य करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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