दुर्ग में ठंड ने बढ़ाई परेशानी, सार्वजनिक जगहों पर अलाव और अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा

दुर्ग, छत्तीसगढ़: दुर्ग जिले में ठंड का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। लगातार गिरते तापमान और सर्द हवाओं के कारण प्रशासन ने विशेष कदम उठाए हैं। शहर के सार्वजनिक स्थलों और ग्रामीण इलाकों में लोगों को राहत देने के लिए अलाव जलाने की व्यवस्था की गई है। सड़कों, बाजारों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड और चौक-चौराहों पर अलाव जलाए गए हैं, जिनके आसपास लोग सुबह-शाम गर्माहट पाने के लिए जुट रहे हैं। नगर निगम की टीम लगातार अलाव स्थलों का निरीक्षण कर रही है ताकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त इंतजाम किए जा सकें।

ठंड के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। दुर्ग जिला अस्पताल में सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज बढ़ गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने वार्डों में अतिरिक्त कंबल, हीटर और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था की है। दुर्ग जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने बताया कि बच्चों और बुजुर्गों पर ठंड का सबसे अधिक असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक ठंड से नसों में सिकुड़न हो सकती है, जिससे ब्रेन स्ट्रोक और हृदयाघात जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टरों ने आम लोगों से अपील की है कि वे गर्म कपड़े पहनें, शरीर को खुला न छोड़ें और पौष्टिक एवं गर्माहट देने वाले आहार का सेवन करें। साथ ही, अनावश्यक रूप से ठंड में बाहर न निकलें और बीमार महसूस होने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल से लोगों को ठंड से कुछ राहत मिल रही है और लगातार जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

हालांकि मौसम में अचानक बदलाव के चलते ठंड का असर आमजन की सेहत पर लगातार महसूस किया जा रहा है। अलाव की व्यवस्था और अस्पतालों में विशेष इंतजामों के बावजूद प्रशासन लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रहा है ताकि किसी को असुविधा या स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या का सामना न करना पड़े।

ठंड की मार: दुर्ग में अलाव और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से लोगों को राहत देने की कोशिश

स्थानीय प्रशासन ने अलाव और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से आम लोगों को ठंड से बचाने की पूरी तैयारी की है। बावजूद इसके, लोगों से सावधानीपूर्वक कदम उठाने और मौसम के बदलाव के प्रति सतर्क रहने की अपील जारी है।