24 रुपये की खाली बाम पर उपभोक्ता को मिला न्याय, आयोग ने 40 हजार रुपये मुआवजा देने का दिया आदेश

कानपुर निवासी एक उपभोक्ता को पांच साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से राहत मिली है। आयोग ने मेडिकल स्टोर संचालक और बाम निर्माता कंपनी को दोषपूर्ण उत्पाद बेचने और शिकायत का समाधान नहीं करने का जिम्मेदार मानते हुए उपभोक्ता को 24 रुपये ब्याज सहित लौटाने के साथ 40 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

मामला अगस्त 2020 का है, जब पैर दर्द से राहत के लिए उपभोक्ता ने एक मेडिकल स्टोर से 12-12 रुपये की दो बाम की डिब्बियां खरीदी थीं। घर पहुंचकर पैकेट खोलने पर दोनों डिब्बियां खाली निकलीं। शिकायत करने के बावजूद न तो उत्पाद बदला गया और न ही राशि वापस की गई, जिसके बाद उपभोक्ता ने जुलाई 2021 में जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान मेडिकल स्टोर ने पैकिंग और निर्माण की जिम्मेदारी कंपनी की बताई, जबकि निर्माता कंपनी ने कहा कि शिकायत उसके गुणवत्ता विभाग में दर्ज कराई जानी चाहिए थी। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि दोषपूर्ण उत्पाद बेचना और उपभोक्ता की शिकायत का समाधान नहीं करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

आयोग ने अपने आदेश में बाम की कीमत 24 रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक पीड़ा, समय की बर्बादी और मुकदमे के खर्च की भरपाई के लिए 40 हजार रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है। आयोग ने कहा कि यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण उदाहरण है और ग्राहकों की शिकायतों की अनदेखी करने वाले विक्रेताओं व कंपनियों के लिए चेतावनी भी है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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