KGMU परिसर में मजारों को हटाने के नोटिस पर विवाद, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने जताई आपत्ति

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में मौजूद मजारों को हटाने के नोटिस ने विवाद खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी, मुस्लिम धार्मिक संगठन और कई सामाजिक संस्थाओं ने इसे आस्था पर चोट बताते हुए विरोध जताया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इसे धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए नोटिस वापस लेने की मांग की है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि KGMU द्वारा हजरत हाजी हरमैन शाह के आस्ताने और हज़रत मखदूम शाह मीना में स्थित 500 साल से अधिक पुरानी मजारों के खिलाफ जारी नोटिस गैरकानूनी है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि वक्फ संपत्तियों से संबंधित कानूनों का उल्लंघन करने वाले नोटिस तुरंत वापस लिए जाएं।

मौलाना मदनी ने बताया कि ये मजारें 700 साल से अधिक पुरानी हैं, जबकि कॉलेज की स्थापना 1912 में हुई थी। उन्होंने कहा कि मीडिया में यह कहना कि कॉलेज परिसर में मजारों का क्या काम है, भ्रम फैलाने वाला है। उन्होंने कहा कि 26 अप्रैल 2025 को हजरत हाजी हरमैन शाह की सीमा में वज़ूख़ाना और इबादतगाह की सुविधाओं को ध्वस्त करना एकतरफा और गैरकानूनी कार्रवाई थी।

उन्होंने कहा कि यह भूमि वक्फ अधिनियम, 1995 के अंतर्गत पंजीकृत वक्फ संपत्ति है और नोटिस जारी करना तथा धमकीपूर्ण रवैया अपनाना पूरी तरह गैरकानूनी है। मौलाना मदनी ने वक्फ बोर्ड से अपील की कि वे प्राचीन धरोहरों और मजारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, प्रभावित हिस्सों की पुनर्बहाली कराएं और मुतवल्लियों को कानूनी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराएं।

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