105 दिन वेटिंलेटर पर थी दीक्षिता…अब कराटे चैंपियन:बोली- कार्डियोलॉजिस्ट बनकर करूंगी इलाज, PM को कविता सुनाएंगे कर्तव्य, आज मोदी करेंगे दिल की बात

छत्तीसगढ़ का स्थापना दिवस इस बार सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि हजारों धड़कनों का उत्सव बनने जा रहा है। नवा रायपुर के सत्य साई संजीवनी अस्पताल में वे बच्चे जुटें हैं, जिनके नन्हें दिल कभी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे। यही बच्चे आज मुस्कुराते चेहरों के साथ PM मोदी से मिलेंगे।
सत्य साईं संजीवनी अस्पताल वही अस्पताल है, जिसने ‘दिल’ की सेवा को अपनी पहचान बना लिया। यहां न कोई कैश काउंटर है, न फीस की पर्चियां दी जाती हैं। अस्पताल ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह बनाई है। आज एक साथ 1 हजार 758 ऐसे बच्चे जुटे हैं, जिनके हार्ट की सर्जरी यहीं हुई थी।
आज इन बच्चों में कुछ कराटे चैंपियन और कोई क्रिकेटर है। दीक्षिता जो कभी 105 दिन वेंटिलेटर पर थी, अब गोल्ड मेडलिस्ट है। वह बड़ी होकर कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती हैं। वहीं कर्तव्य कभी सांस के लिए लड़ रहा था, अब अपनी कविता PM मोदी को सुनाएगा। बच्चे और परिजनों में उत्साह देखने को मिल रहा है।
रिकॉर्ड बनते वक्त सुनील गावस्कर रहे मौजूद
अस्पताल ने एक ही दिन में 1758 बच्चों को एक कार्यक्रम में शामिल किया। इस दौरान इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी सुनील गावस्कर मौजूद रहे। अस्पताल को हाल ही में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की तरफ से सम्मान मिला है। एडज्यूडिकेटर मिस्टर स्वप्निल ने रायपुर पहुंचकर इसकी घोषणा की थी।
इससे पहले 2020 में भी यह अस्पताल एक दिन में सबसे ज्यादा बाल हृदय सर्जरी का रिकॉर्ड बना चुका था। अस्पताल के चेयरमैन डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि यह रिकॉर्ड छत्तीसगढ़ की पहचान को और मजबूत करता है। अब दुनिया जानती है कि रायपुर में एक ऐसा अस्पताल है जहां पैसे नहीं, सिर्फ सेवा की भावना चलती है।
105 दिन वेंटिलेटर पर रही, अब कराटे में गोल्ड मेडलिस्ट है
हरियाणा के हिसार के रमेश शर्मा अपनी 10 साल की बेटी दीक्षिता को लेकर रायपुर पहुंचे हैं। वह याद करते हुए बताते हैं कि 2015 में जब दीक्षिता का जन्म हुआ, उसका दिल विकसित ही नहीं हुआ था। दिल्ली और मुंबई के डॉक्टरों ने कहा था कि इलाज संभव नहीं है। हम पूरी तरह टूट चुके थे।
रमेश शर्मा ने बताया कि इसके बाद किसी ने बताया कि रायपुर में एक ऐसा अस्पताल है, जहां बच्चों का दिल का इलाज मुफ्त में होता है। वहां कोई कैश काउंटर नहीं है। जब बेटी तीन महीने की थी, वे रायपुर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन करना होगा।
कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती है दीक्षिता
दीक्षिता मुस्कुराते हुए कहती है कि मैं बड़ी होकर कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती हूं, ताकि दूसरे बच्चों का इलाज कर सकूं जैसे डॉक्टर अंकल ने मेरा किया। उसने प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक स्पीच भी तैयार की है, जिसे वह मुलाकात के दौरान सुनाएगी। PM मोदी से मिलने के लिए बहुत उत्सुक है।
मुफ्त इलाज पर शक था, अब कहता है -ये अस्पताल दिल वाला है
झारखंड के धनबाद से आईं अंजुला सिंह अपने बेटे कर्तव्य की कहानी सुनाते हुए भावुक हो जाती हैं। बताती हैं कर्तव्य जब 15 दिन का था, तभी दिल की बीमारी का पता चल गया था। हमने पहले कोलकाता और फिर बेंगलुरु में इलाज कराया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। आखिर में रायपुर के सत्य साई अस्पताल पहुंचे।
कर्तव्य की मां बताती हैं, शुरुआत में डर था कि अगर यहां इलाज फ्री है तो क्या उतना अच्छा होगा। लेकिन यहां आकर जो देखा, उसने सब बदल दिया। कर्तव्य का ऑपरेशन हुआ और धीरे-धीरे उसकी सेहत में सुधार आया। “पहले वह बहुत कमजोर था, वजन और लंबाई नहीं बढ़ रही थी। अब वह नॉर्मल बच्चों की तरह बढ़ रहा है, स्कूल जाता है और क्रिकेट खेलता है।
अब तक 37 हजार 500 बच्चों की फ्री सर्जरी
2012 में स्थापित सत्य साई संजीवनी अस्पताल आज छत्तीसगढ़ की नई पहचान बन गया है। अब तक 3 लाख 80 हजार से ज्यादा मरीज अस्पताल के ओपीडी में आ चुके हैं और 37 हजार 500 से अधिक हृदय सर्जरी पूरी तरह मुफ्त में की जा चुकी हैं।
अस्पताल में अब तक 2,500 से 3,000 बच्चे, जिनका हृदय ऑपरेशन किया गया है, आज पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं। राज्योत्सव के अवसर पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं अस्पताल पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री यहां बच्चों से मुलाकात करेंगे।











