बीरगांव निगम में आरक्षण से बदले चुनावी समीकरण, 40 में से 14 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित

बीरगांव नगर निगम के आगामी चुनाव को लेकर मंगलवार को वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई। परिसीमन लागू होने के कारण सभी 40 वार्डों का नए सिरे से आरक्षण किया गया। इनमें 14 वार्ड महिलाओं के लिए और 7 वार्ड एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा ओबीसी और ओबीसी महिला वर्ग के लिए भी वार्ड आरक्षित किए गए हैं। आरक्षण के बाद कई मौजूदा और पूर्व पार्षदों के चुनावी समीकरण बदल गए हैं।
आरक्षण प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों की घोषणा की गई। इसके बाद ओबीसी और ओबीसी महिला वर्ग के वार्डों के लिए लॉटरी निकाली गई। नए आरक्षण के चलते चार बार के पार्षद इकराम अहमद और दो बार के पार्षद मोहम्मद रियाज का वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित हो गया है। महापौर नंदलाल देवांगन का वार्ड भी ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। ऐसे में वे पार्षद का चुनाव लड़ सकते हैं और महापौर पद के लिए अपनी पत्नी के नाम पर भी दावेदारी कर सकते हैं।
आरक्षण से कई नेताओं के बदले समीकरण
कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद सुदन सिकली का वार्ड महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। पिछली बार इसी वार्ड से उनकी पत्नी कविता चुनाव जीती थीं। भाजपा के होरीलाल देवांगन का वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित हुआ है। वे वार्ड 32 से दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी कर सकते हैं।
पिछले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 19, भाजपा ने 10, जोगी कांग्रेस ने 5 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 6 वार्डों में जीत दर्ज की थी। उस समय जोगी कांग्रेस को पूर्व पालिका अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश देवांगन का समर्थन मिला था। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए। छह निर्दलीय पार्षदों ने भी भाजपा और कांग्रेस में से अलग-अलग पक्षों को समर्थन दिया था। इसी समर्थन के जरिए नंद कुमार देवांगन महापौर बने थे।
इस बार भाजपा-कांग्रेस में सीधी टक्कर के आसार
पिछले चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले के बाद इस बार राजनीतिक समीकरण काफी बदल चुके हैं। जोगी कांग्रेस के कई प्रमुख चेहरे अब भाजपा के साथ हैं। एवज देवांगन और उनकी पत्नी डिगेश्वरी देवांगन भी पिछली बार जोगी कांग्रेस से चुनाव जीते थे, लेकिन अब भाजपा में हैं। ऐसे में डिगेश्वरी देवांगन के लिए महापौर पद के टिकट की दावेदारी की चर्चा भी हो सकती है।
आरक्षण के बाद महापौर पद के लिए दोनों प्रमुख दलों में महिला दावेदारों को लेकर सक्रियता बढ़ने की संभावना है। वार्डों के नए आरक्षण ने कई नेताओं के लिए पुराने क्षेत्र से चुनाव लड़ने का रास्ता बंद किया है, जबकि कुछ नेताओं को दोबारा उसी वार्ड से मैदान में उतरने का मौका मिला है। आगामी चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है।











