स्मार्ट मीटर से नहीं बढ़ रही बिजली खपत: रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के सर्वे में जुलाई में 28% से 53% तक खपत घटी

रायपुर, 28 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने स्मार्ट मीटर को लेकर फैल रही भ्रांतियों और अफवाहों के बीच रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के घरेलू उपभोक्ताओं की मई, जून और जुलाई 2026 की बिजली खपत का तुलनात्मक अध्ययन कराया। अध्ययन में सामने आया कि जुलाई 2026 में अधिकांश उपभोक्ताओं की बिजली खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। कंपनी का कहना है कि अधिक बिजली खपत का कारण स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत उपकरणों का अधिक उपयोग है।

रायपुर शहर के 3,11,374 घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के अध्ययन में 1 जून से 26 जून 2026 के बीच कुल 10.85 करोड़ यूनिट बिजली खपत दर्ज हुई थी, जबकि 1 जुलाई से 26 जुलाई 2026 के दौरान यह घटकर 7.77 करोड़ यूनिट रह गई। यानी कुल 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं 400 यूनिट से अधिक खपत करने वाले 1,21,135 उपभोक्ताओं के विश्लेषण में उनकी बिजली खपत में लगभग 44 प्रतिशत की कमी पाई गई।

कंपनी के अनुसार, जिन घरों में स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं, वहां भी अप्रैल, मई और जून में पिछले वर्ष की तुलना में बिजली खपत बढ़ी थी। उदाहरण के तौर पर अवंती विहार, राजीव नगर और कचना (रायपुर) के कुछ उपभोक्ताओं की 2025 की तुलना में 2026 के अप्रैल, मई और जून माह में बिजली खपत अधिक दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि खपत बढ़ने का कारण स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि बिजली उपकरणों का अधिक उपयोग है।

दुर्ग शहर में 400 यूनिट से अधिक खपत वाले 240 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के अध्ययन में मई 2026 में कुल 1,75,451 यूनिट, जून 2026 में 1,65,411 यूनिट और जुलाई 2026 में केवल 76,257 यूनिट बिजली खपत दर्ज हुई। यानी जुलाई माह में लगभग 53 प्रतिशत की कमी आई।

इसी तरह बिलासपुर सिटी सर्किल के 9,717 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के विश्लेषण में मई में औसत खपत 524 यूनिट, जून में 596 यूनिट और जुलाई में घटकर 312 यूनिट दर्ज की गई। इस प्रकार जुलाई में लगभग 43 प्रतिशत कम बिजली खपत दर्ज हुई।

कंपनी ने बताया कि 400 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान योजना का लाभ नहीं मिल पाता, जिससे उनके बिजली बिल अधिक दिखाई देते हैं। हालांकि जुलाई माह में खपत कम होने से अगस्त में जारी होने वाले बिलों में देय राशि कम होगी और अधिक उपभोक्ताओं को योजना का लाभ मिल सकेगा।

एक अन्य कारण स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग भी बताया गया है। लगातार तीन माह तक उच्चतम मांग (Maximum Demand) अधिक दर्ज होने पर सप्लाई अफोर्डिंग शुल्क बिजली बिल में जुड़ रहा था। अब नई व्यवस्था के तहत यह राशि वर्ष में केवल एक बार, दिसंबर माह के बिल (जो जनवरी में जारी होगा) में ही जोड़ी जाएगी।

कंपनी ने कहा कि ‘मोर बिजली ऐप’ के माध्यम से स्मार्ट मीटर उपभोक्ता अपनी प्रतिदिन और प्रत्येक आधे घंटे की बिजली खपत देख सकते हैं। वहीं सामान्य मीटर वाले उपभोक्ता ऐप पर मासिक खपत की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए विभाग द्वारा चेक मीटर भी लगाए जा रहे हैं। अब तक लगाए गए 4,500 चेक मीटरों में दर्ज खपत और स्मार्ट मीटर की खपत एक समान पाई गई है। किसी भी प्रकार की बिजली बिल संबंधी शिकायत के लिए उपभोक्ता टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे स्मार्ट मीटर को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारियों पर विश्वास न करें। कंपनी का कहना है कि वह पारदर्शिता के साथ उपभोक्ताओं को तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराती रहेगी, ताकि स्मार्ट मीटर को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम दूर हो सके।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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