रायगढ़ में हाथियों का आतंक: 164 हाथियों की मौजूदगी, घरों की दीवारें गिराईं और धान की फसल रौंदी

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथियों की बढ़ती मौजूदगी से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। जिले के दोनों वन मंडलों में कुल 164 हाथी अलग-अलग दलों में मौजूद हैं। रात के समय हाथियों के जंगल से निकलकर गांव और बस्तियों तक पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। हाथियों ने घरों और खेतों को नुकसान पहुंचाया है।
घरघोड़ा क्षेत्र के कया-बटुराकछार जंगल में 53 हाथियों का दल पहुंचा है। बीती रात हाथियों का यह दल जंगल से निकलकर बस्ती तक पहुंच गया। हाथियों को देखकर ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकल आए। इस दौरान हाथियों ने दो कच्चे मकानों की दीवारें गिरा दीं। घर में रखी चावल की बोरियां भी हाथियों ने खा लीं। इसके साथ ही खेतों में घुसकर धान की फसल को भी नुकसान पहुंचाया। हालांकि, घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
कई किसानों की धान की फसल बर्बाद
धरमजयगढ़ वन मंडल के अलग-अलग इलाकों में भी हाथियों ने किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। मेढ़रमार में गगन मंडल, संजय अग्रवाल और विनोद जेठवानी की धान की फसल रौंदी गई। वहीं कापू रेंज के पंडरापाठ, परसापारा, सांगुल और तालगांव में ननकु वर्मा, रामेश्वर वर्मा, अकबर वर्मा, भीमू पैंकरा, गुणसागर, हेमसागर, मधु यादव, परसु सिदार और कोरनो यादव की फसल को नुकसान हुआ।
कापू रेंज के कोयलारडांड में बीरा लकड़ा, सोमनाथ राठिया, सुंदर सिंह और रवि राठिया के खेत भी हाथियों के झुंड ने रौंद दिए। फसलों के नुकसान के बाद प्रभावित किसानों को मुआवजे की उम्मीद है।
ड्रोन से निगरानी, ग्रामीणों को किया जा रहा सतर्क
घरघोड़ा सब-डिविजन के एसडीओ आशुतोष मंडावा के मुताबिक, क्षेत्र में हाथियों की संख्या बढ़ी है और दल में छोटे शावक भी शामिल हैं। बड़ी संख्या में हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग की टीम ड्रोन और हाथी मित्र दल की मदद से लगातार निगरानी कर रही है।
वन विभाग की ओर से प्रभावित गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है। लोगों को हाथियों के करीब नहीं जाने और रात के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हाथियों से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। आकलन पूरा होने के बाद प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया की जाएगी।











