धान की उन्नत किस्मों से बढ़ेगी पैदावार, विशेषज्ञों ने किसानों को दिए सही बीज चयन के सुझाव

धान की खेती की तैयारी में जुटे किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने सही बीज चयन को सबसे महत्वपूर्ण बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूमि और जलवायु के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन करने पर धान उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। प्रदेश में विकसित उन्नत धान किस्में किसानों को बेहतर उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और अधिक लाभ दिला सकती हैं।
भूमि और जलवायु के अनुसार करें बीज का चयन
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश को तीन प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जिनमें मैदानी क्षेत्र, उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र और बस्तर पठार क्षेत्र शामिल हैं। प्रत्येक क्षेत्र की मिट्टी, वर्षा और जल उपलब्धता अलग-अलग होने के कारण धान की किस्मों का चयन भी उसी आधार पर किया जाना चाहिए।
ऊंची भूमि के लिए कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली किस्में उपयुक्त मानी जाती हैं। वहीं मध्यम भूमि के लिए सामान्य वर्षा में बेहतर उत्पादन देने वाली किस्मों की सलाह दी जाती है। निचली भूमि में अधिक पानी सहन करने वाली और अधिक उत्पादन देने वाली किस्में किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती हैं।
उन्नत किस्मों से उत्पादन और आय दोनों में बढ़ोतरी
विशेषज्ञों का कहना है कि कई उन्नत धान किस्में रोगरोधी हैं और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं। वहीं सुगंधित धान की किस्मों को बाजार में अधिक कीमत मिलने से किसानों की आय बढ़ने की संभावना रहती है।
प्रदेश में स्वर्णा, महामाया, एमटीयू-1010, राजेश्वरी और हाइब्रिड 6444 जैसी किस्में किसानों के बीच लोकप्रिय हैं। कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी दे रहे हैं।
प्रमाणित बीज अपनाने से किसानों को मिला लाभ
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को प्रमाणित और उपचारित बीजों का उपयोग करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि गैर-प्रमाणित या पारंपरिक बीजों के उपयोग से उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
कई किसानों ने भी अनुभव साझा करते हुए बताया कि भूमि और पानी की स्थिति के अनुसार उन्नत बीजों का चयन करने के बाद उनकी पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कृषि विभाग ने किसानों से खरीफ सीजन की बुवाई से पहले कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर प्रमाणित बीजों का चयन करने की अपील की है।









