क्या ईरान की जंग से अलर्ट हो गया चीन, ताइवान के स्पेस में नहीं ले जा रहा अपने फाइटर जेट

क्या ईरान पर अमेरिकी हमले ने चीन को बुरी तरह से डरा दिया है? यह सवाल 2 वजहों से उठ रहा है. पहला कारण, चीन ने ईरान जंग के बीच सेना के बजट में बढ़ोतरी का फैसला किया है. इसके तहत सेना के बजट में 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जाएगी. दूसरा कारण चीन का ताइवान को लेकर सतर्क रूख अख्तियार करना है. पिछले एक हफ्ते में चीन ने ताइवान की सीमा में अपना एक भी सैन्य फाइटर जेट नहीं भेजा है. ताइवान और चीन के बीच हाल के दिनों में इसे सबसे शांत समय माना जा रहा है.
ताइवान सीमा के पास चीन की मजबूत घेराबंदी
2025 के बाद से ही ताइवान सीमा के पास चीन ने मजबूत घेराबंदी कर रखा है. ग्लोबल ताइवान इंस्टीट्यूट के मुताबिक साल 2025 के आखिर तक 14 युद्धपोत चीन ने ताइवान को घेरने के लिए तैनात कर रखे थी. इसी तरह आए दिन कम से कम 100-110 फाइटर जेट ताइवान के स्पेस में उड़ान भरते रहते हैं.
अमेरिकी खुफिया एजेंसी के मुताबिक 2027 तक चीन ताइवान पर हमला कर सकता है. ताइवान भी इसी डेडलाइन के तहत अपनी तैयारी कर रहा है. चीन का कहना है कि ताइवान उसका हिस्सा है. हालांकि, ताइवान खुद को एक स्वतंत्र मुल्क मानता है.
ईरान के समर्थन में चीन की सिर्फ बयानबाजी
चीन को ईरान का सबसे अच्छा दोस्त माना जा रहा था, लेकिन जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो चीन सिर्फ उसके पक्ष में बयानबाजी करता नजर आया. चीन ने न तो युद्ध लड़ने के लिए अभी तक खुलकर ईरान को हथियार देने की घोषणा की है और न ही अमेरिकी कृत्यों की निंदा की है.
फॉरेन अफेयर्स मैगजीन के मुताबिक चीन को शासन से ज्यादा तेल की चिंता है. चीन को लगता है कि अगर अमेरिकी प्रहार की वजह से ईरान की सत्ता बदल जाती है तो उसे भविष्य में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. क्योंकि, 2025 में चीन के कुल तेल आयात का 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मध्य पूर्व से आया. इनमें लगभग 13 प्रतिशत ईरान से आया.











