दहेज मौत मामलों में क्रूरता साबित करना जरूरी: एमपी हाईकोर्ट

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दहेज मौत से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि ऐसे मामलों में आरोप सिद्ध करने के लिए क्रूरता या उत्पीड़न को साबित करना अनिवार्य है। कोर्ट ने इसी आधार पर राज्य सरकार द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत के दोषमुक्ति के आदेश को चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल यह तथ्य कि विवाह के कुछ वर्षों के भीतर महिला की मृत्यु हुई, दहेज मौत का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को यह भी साबित करना होगा कि मृतका को मौत से ठीक पहले दहेज की मांग को लेकर मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया था।
मामले में निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी (दहेज मौत) और 498-ए (क्रूरता) के तहत दोषमुक्त कर दिया था। इस फैसले को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दहेज मौत जैसे गंभीर अपराधों में भी कानून के निर्धारित तत्वों का ठोस प्रमाण होना आवश्यक है, केवल अनुमान या आरोप के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती।











