बारिश के बाद भी जमकर दौड़ा कटघोरा: सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती पर पुलिस की अगुवाई में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन

कोरबा: सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर कटघोरा नगर में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन जोश और उत्साह के साथ संपन्न हुआ. भारी बारिश के बावजूद लोगों में एकता की भावना देखते ही बन रही थी. यह आयोजन थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी के नेतृत्व में पुलिस विभाग के तत्वावधान में किया गया.

सभी वर्गों की रही उल्लेखनीय भागीदारी

इस दौड़ में नगर के सभी वर्गों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, सरकारी कर्मचारियों और स्कूली छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. थाना प्रभारी तिवारी ने बताया कि सरदार पटेल की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा. प्रतिभागियों ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के साथ एकता, समरसता और राष्ट्रीय एकीकरण के संदेश को जीवंत किया.

दौड़ का मार्ग और आयोजन की झलक

‘रन फॉर यूनिटी’ की शुरुआत अग्रसेन भवन से हुई. वहां से प्रतिभागी शहीद वीर नारायण चौक होते हुए थाना परिसर तक पहुंचे. अंत में थाना परिसर में वृक्षारोपण और विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं. स्थानीय नागरिकों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि बारिश में भी लोगों का उत्साह सरदार पटेल के प्रति सम्मान और देशप्रेम को दर्शाता है.

एसडीएम तन्मय खन्ना ने भी लगाई दौड़

कार्यक्रम में कटघोरा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तन्मय खन्ना ने भी हिस्सा लिया. उन्होंने आम नागरिकों के साथ दौड़ लगाकर एकता का संदेश दिया. एसडीएम खन्ना ने कहा कि कटघोरा पुलिस और नगरवासियों की यह पहल अनुकरणीय है. भारी वर्षा के बावजूद लोगों ने उत्साह के साथ भाग लेकर सरदार पटेल के आदर्शों को आत्मसात किया.

एकता का प्रतीक हैं सरदार पटेल

थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल केवल स्वतंत्र भारत के प्रथम गृहमंत्री नहीं थे, बल्कि उन्होंने राष्ट्र के एकीकरण में जो भूमिका निभाई, वह युगों-युगों तक स्मरणीय रहेगी. उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए नगर के सभी नागरिकों, विद्यार्थियों और संस्थाओं का आभार प्रकट किया.

बता दें कि, सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को गुजरात के नांदिया में हुआ था. उन्हें “भारत के लौह पुरुष” के नाम से भी जाना जाता है, वे देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे. स्वतंत्रता के बाद 560 से ज़्यादा रियासतों और भारतीय संघ के एकीकरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उन्हें व्यापक रूप से जाना जाता है. उनके नेतृत्व ने यह सुनिश्चित किया कि भारत सबसे कठिन समय में एक एकीकृत और प्रतिष्ठित राष्ट्र के रूप में उभरे.

close