सफाई ठेका विवाद पर रिसाली नगर निगम में हंगामा, धरने पर बैठी महापौर बेहोश होकर गिरीं

रिसाली नगर निगम में सफाई ठेके को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को और गहरा गया। ठेका कर्मचारियों ने सुबह महापौर शशि सिन्हा के घर का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। महापौर और सफाई कर्मियों के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका, जिसके चलते नगर निगम के सभी वार्डों में पूरे दिन सफाई कार्य प्रभावित रहा।
निगम कार्यालय खुलने के बाद महापौर आयुक्त मोनिका वर्मा के कक्ष के सामने धरने पर बैठ गईं। उनके समर्थन में कांग्रेस के कई पार्षद भी मौजूद रहे। लंबे समय तक धरने पर बैठने के दौरान दोपहर में महापौर अचानक अचेत होकर गिर पड़ीं। इसके बाद पार्षदों ने उन्हें तुरंत सेक्टर-9 अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार किया गया। घटना के दौरान निगम कार्यालय परिसर में पुलिस बल भी तैनात रहा।
जानकारी के अनुसार रिसाली नगर निगम के गठन से पहले यह क्षेत्र भिलाई नगर निगम के अंतर्गत आता था। वर्ष 2016 में सफाई कार्य के लिए एक कंपनी को ठेका दिया गया था। नियमों के अनुसार कंपनी को कर्मचारियों का भविष्य निधि शासन के खाते में जमा करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
इस स्थिति को देखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने आदेश जारी किया कि श्रमिकों की नियुक्ति केवल एजेंसी के माध्यम से ही की जाएगी। 23 अप्रैल 2020 को जारी आदेश के अनुसार रिसाली नगर निगम को सफाई कार्य के लिए 288 कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल श्रमिक रखने की अनुमति दी गई थी और यह काम प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कराया जाना तय किया गया।
सफाई का ठेका आमतौर पर एक वर्ष के लिए दिया जाता है, लेकिन पिछले वर्षों में इसे दो-दो साल तक बढ़ाया गया था। वर्ष 2024-25 की निविदा अवधि समाप्त होने के बाद परिषद ने इसे दो महीने के लिए और बढ़ाया था। हाल ही में महापौर परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि निगम सीधे सफाई कर्मियों से काम कराएगा और उनका वेतन सीधे उनके खातों में दिया जाएगा। इसी फैसले के बाद से विवाद की स्थिति बन गई है।











