एक जज से भी ज्यादा प्रोटेक्शन, इस वक्त कितने ताकतवर हैं CEC ज्ञानेश कुमार?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2023 के एक कानून का हवाला देते हुए कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को कानूनी संरक्षण मिला हुआ है. दरअसल,मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 16 में CEC और चुनाव आयुक्तों के लिए खास सुरक्षा का प्रावधान है. कानून के मुताबिक, किसी मौजूदा या पूर्व CEC या चुनाव आयुक्त के खिलाफ उनके आधिकारिक काम के दौरान किए गए किसी काम, फैसले या कही गई बात को लेकर सिविल या क्रिमिनल कार्रवाई अदालत में आगे नहीं बढ़ाई जा सकती.

यह सुरक्षा पद से हटने या रिटायर होने के बाद भी लागू रहती है. यानी अगर कोई मामला उनके उस काम से जुड़ा है, जो उन्होंने अपने आधिकारिक पद की जिम्मेदारी निभाते हुए किया है, तो अदालत उस पर सिविल या क्रिमिनल कार्यवाही स्वीकार या जारी नहीं कर सकती. इसी तरह का कानूनी संरक्षण जजों को भी मिला है. हालांकि, जज के अगर किसी फैसले में भ्रष्टाचार का मामला आता है, तो उनके खिलाफ केस दाखिल हो सकता है. चीफ जस्टिस की सलाह पर जज के खिलाफ केस दाखिल और जांच का प्रावधान है. ECI मामले में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. इसलिए 2023 के कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.

जजों को भी मिलता है कानूनी संरक्षण

सुप्रीम कोर्ट के वकील ध्रुव गुप्ता के मुताबिक, जजों को भी उनके न्यायिक काम से जुड़े मामलों में व्यापक कानूनी सुरक्षा मिलती है. आम तौर पर किसी जज के न्यायिक कार्य के दौरान किए गए काम को लेकर उनके खिलाफ सिविल या क्रिमिनल केस दर्ज नहीं किया जा सकता. यह सुरक्षा रिटायरमेंट के बाद भी बनी रहती है. इसके लिए जजेस (प्रोटेक्शन) Act, 1985 की धारा 3 का प्रावधान है. इसके अलावा BNS की धारा 15 और BNSS की धारा 218 में भी पहले से मंजूरी से जुड़ा प्रावधान है.

लेकिन जजों को मिली यह सुरक्षा हर तरह के काम पर लागू नहीं होती. ध्रुव गुप्ता के मुताबिक, यह सुरक्षा सिर्फ ईमानदारी से किए गए न्यायिक काम तक सीमित है. अगर किसी जज पर भ्रष्टाचार या रिश्वत लेने जैसे आरोप हों, तो ऐसे मामले में जरूरी मंजूरी के बाद कार्रवाई हो सकती है. हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज के मामले में CJI से सलाह लेने का प्रावधान भी बताया गया है.

CEC के मामले में क्या अलग है?

ध्रुव गुप्ता के मुताबिक, CEC और चुनाव आयुक्तों को मिलने वाला संरक्षण संवैधानिक नहीं, बल्कि कानूनी (statutory protection) है. संविधान में मुख्य रूप से राष्ट्रपति और राज्यपालों को अनुच्छेद 361 के तहत विशेष सुरक्षा मिली है. वहीं सांसदों और विधायकों को सदन में कही गई बात या दिए गए वोट के लिए अनुच्छेद 105 और 194 के तहत संरक्षण मिलता है.

जजों और CEC को मिलने वाली संवैधानिक सुरक्षा मुख्य रूप से उनके पद से हटाने की विशेष प्रक्रिया से जुड़ी है. इसके अलावा CEC और चुनाव आयुक्तों के लिए 2023 के कानून की धारा 16 अलग से कानूनी सुरक्षा देती है.

क्या यह सुरक्षा हमेशा बनी रहेगी?

नहीं. ध्रुव गुप्ता के मुताबिक, CEC और चुनाव आयुक्तों को मिली यह सुरक्षा संसद के बनाए कानून पर आधारित है. इसलिए संसद चाहे तो इसमें बदलाव कर सकती है. साथ ही, 2023 के इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है. यानी धारा 16 के तहत मिला यह संरक्षण फिलहाल कानून में मौजूद है, लेकिन इसकी वैधता को लेकर अदालत में याचिका पेंडिंग है. अब देखना होगा कि अदालत क्या फैसला लेती है.

यह भी पढ़ें: SC का फैसला भी अभी लागू नहीं हो पाएगा: क्या है OBC क्रीमी लेयर विवाद?

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close