भोपाल में ‘जहरीली हवा’ पर कलेक्टर-कमिश्नर को NGT की फटकार, करोड़ों के फंड का मांगा हिसाब

राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण और धूल के गुबार पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भोपाल कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया है। साथ ही केंद्र सरकार के नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) को लेकर सवाल उठाते हुए पांच साल में इस योजना के तहत प्राप्त राशि और उसके खर्च का विवरण मांगा है।
भोपाल सिटीजन्स फोरम ने राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण, सड़कों पर उड़ती धूल और एक्यूआइ मानिटरिंग स्टेशनों पर पानी का छिड़काव किए जाने को लेकर याचिका लगाई थी।
इस पर एनजीटी ने सात जनवरी को सुनवाई करते हुए एक्यूआई मानिटरिंग स्टेशनों के पास पानी का छिड़काव बंद करने और वास्तविक डेटा सामने लाने की बात कही थी।

लेकिन एनजीटी के इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। ऐसे में एनजीटी ने भोपाल कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर से कहा है कि सात जनवरी को दिए गए निर्देशों का पालन क्यों नहीं हुआ, इसका जवाब दो हफ्ते में दें, वरना कोर्ट में सशरीर पेश होना पड़ेगा।
कलेक्टर और कमिश्नर अब सीधे तौर पर जिम्मेदार
ट्रिब्यूनल ने माना कि वायु प्रदूषण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कलेक्टर और निगम कमिश्नर की उपस्थिति और जवाबदेही अनिवार्य है। कोर्ट ने दोनों को मामले में प्रतिवादी के रूप में नामजद किया है। बेंच ने सख्त लहजे में कहा, हमें यह देखकर खेद है कि ट्रिब्यूनल के पुराने आदेशों पर प्रशासन ने कोई रिपोर्ट फाइल नहीं की। यह लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
करोड़ों के फंड का मांगा पाई-पाई का हिसाब
एनजीटी ने केंद्र सरकार की नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) योजना के तहत मिलने वाले बजट पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। कोर्ट ने निगम कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि वे पिछले पांच साल में इस योजना के तहत मिली राशि और उसे कहां-कहां खर्च किया गया, इसका पूरा ब्यौरा दें। ट्रिब्यूनल यह जानना चाहता है कि डस्ट मैनेजमेंट, सॉलिड वेस्ट और ट्रैफिक मैनेजमेंट के नाम पर खर्च हुए करोड़ों रुपयों के बावजूद शहर की हवा में सुधार क्यों नहीं हुआ?
पुरानी पद्धतियों को छोड़ नए तकनीक अपनाएं
बेंच ने टिप्पणी करते हुए साफ किया कि ”ग्रेडेड रिस्पान्स एक्शन प्लान” (जीआरएपी) का पालन सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखना चाहिए।
ट्रिब्यूनल ने हाई लेवल कमेटी को जीआरएपी के कार्यान्वयन की नियमित समीक्षा करने के आदेश दिए हैं।
बेंच ने टिप्पणी की कि 2019 से चल रही इस योजना का लक्ष्य 2024 तक प्रदूषण 30 प्रतिशत कम करना था, लेकिन परिणाम संतोषजनक नहीं हैं।
अब समय आ गया है कि पुरानी पद्धतियों को छोड़कर नई तकनीकों का उपयोग किया जाए ताकि इस योजना के सार्थक परिणाम मिल सकें। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।

jagjaahir desk

जगजाहिर में स्पोर्ट्स बीट पर काम कर रहे हैं। स्पोर्ट्स में क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, टेनिस, बैडमिंटन और एथलेटिक्स गेम्स के मामलों पर काफी अच्छी पकड़ रखते हैं। हमारे पास विभिन्न मुद्दों पर लिखने का 8 साल से अधिक समय का अनुभव है। पत्रकारिता के अपने इस करियर में कई बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स जिसमें साल 2015 और 2019 और 2023 वनडे वर्ल्ड कप, आईपीएल और फुटबॉल वर्ल्ड कप को कवर किया है।
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