रायपुर के DKS में अब गठिया-डायबिटीज-थायरॉइड-हार्मोनल समस्या का इलाज संभव:रुमेटोलॉजी-एंडोक्राइनोलॉजी विभाग खोलने की मिली अनुमति

रायपुर के DKS सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में रुमेटोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी विभाग खोलने की अनुमति मिल गई है। इसके बाद DKS सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रदेश का पहला सरकारी संस्थान होगा जहां, गठिया, डायबिटीज, थायरॉइड और हार्मोनल समस्या वाले मरीजों को एक ही जगह सुपर स्पेशियलिटी इलाज मिल सकेगा।

ये फैसला स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में हुई रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और DKS अस्पताल की स्वशासी समिति की सामान्य सभा की बैठक में लिया गया है।

समझिए इससे मरीजों को क्या फायदा होगा

रुमेटोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी सुपर स्पेशियलिटी विभाग हैं। गठिया और हार्मोन संबंधी बीमारियों का स्पेशलिस्ट से इलाज होगा। संयुक्त दर्द, गठिया, थायरॉइड, हार्मोनल समस्याओं और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज विशेषज्ञ करेंगे। अस्पताल में दोनों विभागों के लिए 10-10 बेड के नए वार्ड को मंजूरी मिली है।

सचिव ने निरीक्षण के बाद मांगा था प्रस्ताव

स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित कटारिया ने 22 सितंबर को अस्पताल का निरीक्षण किया था।निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने दोनों विभाग शुरू करने की मांग रखी थी। इसके बाद सचिव ने इसका विस्तृत प्रस्ताव बनाने और भेजने के निर्देश दिए थे।

राज्य में सरकारी स्तर पर स्पेशलिस्ट की कमी

छत्तीसगढ़ के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में रुमेटोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ मौजूद नहीं हैं। अंबेडकर अस्पताल में एक DM एंडोक्राइनोलॉजी डॉक्टर हैं, लेकिन वे सिर्फ बच्चों का इलाज करते हैं।

चर्चा है कि विभाग शुरू होने पर उन्हें DKS में शिफ्ट किया जा सकता है, हालांकि पहले भी 5 साल पहले ऐसा प्रयास असफल हुआ था। डॉक्टर ने प्रस्तावित OPD में बैठने से इनकार कर दिया था।

डायबिटीज और हार्मोनल बीमारियों में तेजी से बढ़ोतरी

रायपुर समेत पूरे प्रदेश में डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। अब 10 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज मिलने लगी है। छोटे बच्चों में टाइप-1 यानी जेनेटिक डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है। हार्मोनल समस्याओं, थायरॉइड और अन्य बीमारियों के इलाज के लिए विशेषज्ञों की भारी कमी है।

वहीं जोड़ों के दर्द, गठिया और ऑटोइम्यून बीमारियों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में ऐसे मरीजों का इलाज जनरल मेडिसिन और आर्थोपेडिक्स विभाग संभाल रहा है, जो सुपर स्पेशियलिटी की श्रेणी में नहीं आता। रुमेटोलॉजी DM/DNB सुपर स्पेशियलिटी कोर्स है, जिसकी राज्य में कमी है।

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