एक भैंस, दो दावेदार! कोटा थाने में 4 घंटे चला हाई-वोल्टेज ड्रामा

राजस्थान के कोटा जिले के कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में एक अनोखा विवाद सामने आया है, जहां एक भैंस और उसके बछड़े के मालिकाना हक को लेकर दो लोगों ने इतना हंगामा किया कि पुलिस को करीब चार घंटे तक जुटे रहना पड़ा. यह मामला तब शुरू हुआ जब दोनों पक्ष थाने पहुंचकर एक ही भैंस पर अपना-अपना दावा ठोकने लगे. पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए भैंस को जब्त कर थाने लाया और असली मालिक की पहचान के लिए पशु चिकित्सकीय जांच करवाई.
विवाद की शुरुआत और थाने में हंगामा
कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में बालिता रोड निवासी इंद्रजीत केवट और रामलाल मेघवाल दोनों ने एक ही भैंस पर मालिकाना हक जताया. दोनों पक्ष थाने पहुंचे और जोर-शोर से अपना दावा करने लगे. हंगामा बढ़ता देख थाना अधिकारी कौशल्या गालव ने भैंस को गाड़ी में लोड कर थाने लाया गया. दोनों पक्षों ने भैंस को अपना बताते हुए पुरानी फोटो और अन्य दावे पेश किए, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं दे सके.
उम्र से तय हुआ फैसला: मेडिकल जांच का सहारा
इंद्रजीत केवट ने भैंस की उम्र करीब 7 साल बताई, जबकि रामलाल मेघवाल ने साढ़े 4 साल कहा. पुलिस ने मामले को सुलझाने के लिए पशु चिकित्सकों की टीम बुलाई और भैंस का मेडिकल परीक्षण करवाया. जांच रिपोर्ट में भैंस की उम्र 4 से 5 साल के बीच पाई गई, जो रामलाल मेघवाल के दावे से मेल खाती थी.
मंदिर में कसम और फोटो के बावजूद नहीं माने दोनों पक्ष
विवाद सुलझाने के प्रयास में पुलिस ने दोनों पक्षों को मंदिर में कसम खाने और भैंस के साथ पुरानी फोटो दिखाने को कहा. इंद्रजीत केवट ने कुछ फोटो पेश किए, लेकिन रामलाल ने भी अपने दावे मजबूत रखे. दोनों पक्ष किसी भी हाल में पीछे हटने को तैयार नहीं हुए. आखिरकार मेडिकल रिपोर्ट को आधार मानते हुए पुलिस ने भैंस और उसके बछड़े को रामलाल मेघवाल को सौंप दिया.
पुलिस का अंतिम फैसला और आगे की कार्रवाई
थाना अधिकारी कौशल्या गालव ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर फिलहाल भैंस रामलाल को सौंप दी गई है. इंद्रजीत केवट को ठोस सबूत जैसे खरीद का बिल, पशु मेले की रसीद या अन्य दस्तावेज पेश करने को कहा गया है. अगर वे मजबूत सबूत लाते हैं, तो मामला फिर से खोला जा सकता है. पुलिस ने दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने की सलाह दी है.
यह अनोखा मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है. लोग पुलिस की इस मेहनत और मेडिकल जांच के आधार पर फैसला लेने की तारीफ कर रहे हैं. हालांकि, ऐसे छोटे-छोटे विवाद ग्रामीण क्षेत्रों में आम हैं, लेकिन पुलिस की चार घंटे की मशक्कत ने इसे खास बना दिया











