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रायपुर। अपनी समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और आदिवासी परंपराओं के लिए पहचाना जाने वाला छत्तीसगढ़ अब खेलों से भी अपनी नई पहचान भी बना रहा है। बस्तर ओलंपिक की अभूतपूर्व सफलता के बाद अब सरगुजा ओलंपिक 2025-26 उत्तर छत्तीसगढ़ में खेलों के एक नए युग की शुरुआत बनकर सामने आया है। यह आयोजन एक खेल प्रतियोगिता होने के साथ ही साथ ग्रामीण और आदिवासी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का एक सशक्त अभियान भी बन चुका है।
छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार खेल प्रतियोगिताओं को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री का मानना है कि खेल शारीरिक क्षमता को बढ़ाने के साथ ही साथ व्यक्ति में अनुशासन, नेतृत्व, टीमवर्क और आत्मविश्वास जैसी महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों को भी विकसित करने का काम करता है। इसी विचारधारा के साथ बस्तर ओलंपिक के बाद अब सरगुजा ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है जो उत्तर छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोल रहा है।
खेलों के माध्यम से छत्तीसगढ़ बन रहा विकास का नया मॉडल
सरगुजा ओलंपिक का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार खेलों को मनोरंजन, प्रतियोगिता, खेल भावना के अलावा समग्र विकास के साधन के रूप में देखती है। आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर खेल प्रतिभाओं को उचित मंच और प्रशिक्षण नहीं मिल पाता। इस समस्या को दूर करने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री ने खेल आयोजनों को गांव-गांव तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
सरगुजा ओलंपिक में लगभग 3 लाख 50 हजार खिलाड़ियों का पंजीयन इस आयोजन की लोकप्रियता और व्यापकता को दर्शाता है। पंजीयन की संख्या वह आंकड़ा है जो यह बता रही है कि उत्तर छत्तीसगढ़ के युवाओं में कितनी ऊर्जा और प्रतिभा मौजूद है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि “जिस प्रकार बस्तर ओलंपिक ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है उसी प्रकार सरगुजा ओलंपिक भी खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा।” प्रदेश के मुखिया का यह विश्वास राज्य के युवाओं को उत्साह से भर रहा है।
सरगुजा ओलंपिक की महत्वपूर्ण विशेषता महिला खिलाड़ियों की बड़ी संख्या है। लगभग 1 लाख 89 हजार महिलाओं ने इस आयोजन में अपना पंजीयन कराया है जबकि पुरुष खिलाड़ियों की संख्या महिलाओं की संख्या से कम लगभग 1 लाख 59 हजार है। यह संख्या बल यह दर्शाता है कि ग्रामीण और आदिवासी समाज में महिलाओं की भूमिका तेजी से बदल रही है। खेलों में महिलाओं की इस भागीदारी में सामाजिक परिवर्तन का संकेत भी छुपा हुआ है। जब ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां खेल मैदान में उतरती हैं तो वे पूरे समाज के लिए प्रेरणा बनती हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने आरम्भ से ही महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने का काम किया है। चाहे स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा देना हो, शिक्षा के क्षेत्र में उनके लिए अवसर बढ़ाना हो या खेलों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना हो हर क्षेत्र में सरकार सक्रिय होकर काम कर रही है।
12 खेल विधाओं से मिल रहा खेल प्रतिभाओं को मंच
सरगुजा ओलंपिक में कुल 12 खेल विधाओं को शामिल किया गया है। इन 12 खेल विधाओं में कबड्डी, खो-खो, तीरंदाजी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, हॉकी, कुश्ती और रस्साकसी जैसे खेल प्रमुख हैं। इन खेलों की चयन प्रक्रिया इतना आसान बनाया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवा आसानी से इनमें भाग ले सकें।
सरगुजा ओलंपिक में पारंपरिक खेलों के साथ-साथ आधुनिक खेलों को भी शामिल किया गया है जिससे खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले। इस संतुलन से यह आयोजन और अधिक समावेशी बन रहा है। इन प्रतियोगिताओं का आयोजन तीन चरणों, विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर किया जा रहा है। इस तीन-स्तरीय संरचना का उद्देश्य है कि गांवों से लेकर शहरों तक हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को आगे बढ़ने का मौका मिले।










