नगर विकास परियोजनाओं पर खर्च की रफ्तार धीमी, करोड़ों की योजनाएं फाइलों में अटकी

छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को विभिन्न विकास योजनाओं के तहत 834 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है, लेकिन अधिकांश परियोजनाएं अब तक शुरुआती प्रक्रियाओं से आगे नहीं बढ़ सकी हैं। मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना और 15वें वित्त आयोग के तहत मिली राशि से शहरों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और नई पहचान देने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कई परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है।

कई शहरों में परियोजनाएं शुरुआती चरण में

मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के अंतर्गत प्रदेश के 13 नगर निगमों में 26 बड़े विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें सड़क चौड़ीकरण, जलापूर्ति, तालाब सौंदर्यीकरण, बस टर्मिनल, कॉरिडोर और अन्य शहरी विकास परियोजनाएं शामिल हैं। राजधानी रायपुर में स्वीकृत कई प्रमुख परियोजनाओं में अब तक ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी है। वहीं बिलासपुर, धमतरी, रायगढ़, कोरबा, अंबिकापुर और अन्य नगर निगम क्षेत्रों में भी अधिकांश कार्य प्रारंभिक चरण या सीमित प्रगति पर हैं।

नोडल अधिकारियों ने शुरू की समीक्षा

राज्य सरकार द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारियों ने नगरीय निकायों का दौरा शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने निगम आयुक्तों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। कई स्थानों पर विकास कार्यों का भौतिक निरीक्षण भी किया गया। नोडल अधिकारियों को यह रिपोर्ट तैयार करनी है कि किन योजनाओं में देरी हो रही है और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

शहरों को नई पहचान देने का लक्ष्य

सरकार का उद्देश्य नगरोत्थान योजना के माध्यम से शहरों में आधुनिक अधोसंरचना विकसित करना, यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और नागरिक सुविधाओं का विस्तार करना है। इसके लिए करोड़ों रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। हालांकि जमीनी स्तर पर परियोजनाओं की धीमी प्रगति को देखते हुए अब शासन ने निगरानी और समीक्षा प्रक्रिया तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि लंबित परियोजनाओं को गति देने के लिए नियमित निरीक्षण और प्रगति रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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