पवन सिंह की एंट्री, कुशवाहा की टेंशन! BJP के फैसले से बढ़ी उपेंद्र की मुश्किलें

बिहार की राजनीति में ‘पावर स्टार’ पवन सिंह एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं. चौंकाने वाली बात ये है कि इस बार भी पवन सिंह राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक रणनीति के लिए चुनौती बनकर उभरे हैं. दरअसल, कहा जाता है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में काराकाट सीट पर उपेंद्र कुशवाहा की हार में पवन सिंह का अहम रोल था. इसके बाद अब बिहार विधान परिषद चुनावों को लेकर उनकी उम्मीदों को एक और झटका लगा है.

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बिहार सरकार में मंत्री और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जा सकता था. उम्मीद थी कि खाली 9 सीटों में से एक उन्हें मिलेगी, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दीपक प्रकाश की जगह पवन सिंह को मैदान में उतारकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए. सूत्रों के मुताबिक, BJP ने प्रस्ताव दिया था कि उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी का BJP में विलय कर लें. हालांकि, शुरुआती सहमति के बावजूद यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई. इसके बाद से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि विधान परिषद के लिए उम्मीदवारों के चयन के दौरान BJP ने कुशवाहा खेमे को उचित महत्व नहीं दिया

दीपक प्रकाश दो बार बने मंत्री

दीपक प्रकाश ने दो बार मंत्री पद की शपथ ली है, जबकि वे अभी तक न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, कोई व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक मंत्री रह सकता है. इसके बाद, विधानसभा या परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य हो जाता है. नतीजतन, दीपक प्रकाश के सामने अब ऐसी सदस्यता हासिल करने की चुनौती है.

मुश्किल में उपेंद्र कुशवाहा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि उपेंद्र कुशवाहा अब मुश्किल स्थिति में हैं. अगर वे NDA से अलग होने का फैसला करते हैं, तो सवाल उठ सकता है कि क्या उनकी पार्टी के विधायक उनके साथ बने रहेंगे. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार विधायकों में से तीन पहले ही असंतोष जता चुके हैं, जबकि चौथी विधायक उनकी पत्नी हैं.

क्या होगा कुशवाहा का अगल कदम?

बिहार के बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच, BJP अब कुशवाहा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपेंद्र कुशवाहा के बजाय सम्राट चौधरी को प्राथमिकता दे रही है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उपेंद्र कुशवाहा NDA के साथ बने रहते हैं या कोई नया राजनीतिक रास्ता चुनते हैं.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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