उदयपुर वीडियो कांड’ पर सियासी संग्राम: हनुमान बेनीवाल ने ‘एपस्टीन आइलैंड’ से की तुलना, सरकार पर लगाए संगीन आरोप

राजस्थान :  सियासत में इन दिनों ‘उदयपुर वीडियो कांड’ ने ऐसा भूचाल ला रखा है, जिसकी गूंज सत्ता के गलियारों तक साफ सुनाई दे रही है.नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बाद अब नागौर सांसद और आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने इस मामले पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए पूरी भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है.बेनीवाल ने इस कथित सीडी कांड की तुलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित Jeffrey Epstein के ‘एपस्टीन आइलैंड’ प्रकरण से कर दी, जिससे सियासी तापमान और बढ़ गया है.

मीडिया से रूबरू होते हुए बेनीवाल ने दावा किया कि इस सीडी में सिर्फ छोटे-मोटे नेता नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय के कुछ लोग, कैबिनेट मंत्री और संगठन के बड़े पदाधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं.उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर पूरा सच सामने आ गया तो कई बड़े चेहरे बेनकाब हो जाएंगे. बेनीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों ने कांग्रेस नेताओं को यह सीडी सौंपी थी, वे अब पछता रहे हैं। उनके मुताबिक, “वे लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस ने शायद सत्ता पक्ष के साथ सेटिंग या सौदेबाजी कर ली है.


सांसद बेनीवाल ने उदयपुर के एक कद्दावर पूर्व नेता का जिक्र करते हुए कहा कि जिनकी साख बहुत बड़ी थी, उन्हें दरकिनार कर शहर में गंदा खेल खेला जा रहा है.उन्होंने पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उदयपुर आईजी ने किसी बड़े नेता के फोन आने के बाद सीडी और सबूतों को खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की, जबकि पुलिस के पास पूरे फुटेज मौजूद हैं। इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्मा गया है.

इधर, मामले का कानूनी पक्ष भी कम गंभीर नहीं है.उदयपुर में भाजपा की एक महिला नेत्री ने एक अधिवक्ता विशाल गुर्जर पर आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और दुष्कर्म के आरोप लगाए हैं.भूपालपुरा थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, नेत्री का आरोप है कि आरोपी ने उन्हें नशीला पदार्थ पिलाया, जिससे वे बेहोश हो गईं.

होश में आने पर आरोपी ने कथित तौर पर अश्लील वीडियो बनाने की बात कही और उसे वायरल करने की धमकी देकर दबाव बनाया.नेत्री ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने एआई तकनीक की मदद से वीडियो से छेड़छाड़ कर अन्य परिचित लोगों के साथ आपत्तिजनक दृश्य तैयार किए और उनकी कई कॉपियां बनाकर अलग-अलग लोगों को दीं.

शिकायत के बाद पुलिस ने 11 फरवरी की देर रात कार्रवाई करते हुए आरोपी को चांदपोल इलाके स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि रात करीब 2 से 4 बजे के बीच की यह पूरी कार्रवाई वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। सामने आए फुटेज में पुलिस टीम रात करीब 2 बजे घर पहुंचती दिखाई देती है.

इस दौरान सफेद ब्लेजर पहने एक कम कद के युवक से बातचीत होती नजर आती है। करीब 4 बजे दो पुलिसकर्मी आरोपी को पकड़कर बाहर लाते हैं और वाहन में बैठा देते हैं. वीडियो में यह भी दिख रहा है कि गिरफ्तारी के बाद वही युवक फोन पर किसी से बातचीत करता दिखाई देता है, जबकि उसके साथ दो अन्य युवक मौजूद हैं, जिनके हाथ में सब्बल और भारी हथौड़ा नजर आता है.

इन दृश्यों के सामने आने के बाद आरोपी के परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। परिजनों ने पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, एसपी योगेश गोयल और आईजी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है. पुलिस ने आरोपी को पूछताछ के बाद अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले की जांच डीएसपी गोपाल चंदेल कर रहे हैं, जबकि पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने इस विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार किया है.

एक ओर गंभीर आपराधिक आरोप, दूसरी ओर सीडी और कथित राजनीतिक संरक्षण के दावे—इन सबके बीच ‘उदयपुर वीडियो कांड’ अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि प्रदेश की बड़ी सियासी जंग में तब्दील होता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक बयानबाजी इस प्रकरण को और किस मोड़ पर ले जाती है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर टिकी

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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