रीवा नगर निगम में ‘दोहरा मापदंड’: RSS के कार्यक्रम पर छिड़ा सियासी घमासान, मंगू ने खोला मोर्चा

रीवा: सफेद शेरों की धरती एक बार फिर नगर निगम के ‘नियमों के खेल’ को लेकर गरमा गई है. इस बार मुद्दा विकास कार्य नहीं, बल्कि शहर के पार्कों के आवंटन में की जा रही ‘पिक एंड चूज’ की नीति है.पद्मधर पार्क में आयोजित RSS के ‘बाल पथ संचलन’ कार्यक्रम ने शहर की सियासत में उबाल ला दिया है.
कांग्रेस के कद्दावर नेता गुरुमीत सिंह मंगू ने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे सीधे तौर पर सत्ता के दबाव में लिया गया फैसला बताया है। मंगू का कहना है कि नगर निगम की तिजोरी भरने के लिए आम जनता और विपक्षी दलों से तो मोटी रकम वसूली जाती है, लेकिन जब बात सत्ता पक्ष के करीबी संगठनों की आती है, तो नियम ‘कूड़ेदान’ में फेंक दिए जाते हैं.
विरोध प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागे हैं:
आम जनता, NGO या विपक्षी दलों को एक छोटे आयोजन के लिए 5,100 से 21,000 रुपये तक की रसीद कटवानी पड़ती है. आरोप है कि RSS के कार्यक्रम के लिए न तो कोई रसीद काटी गई और न ही निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया.
गुरुमीत सिंह मंगू ने इसे ‘राजस्व की चोरी’ करार देते हुए पूछा है कि क्या नगर निगम केवल खास विचारधारा के लोगों की जागीर बन चुका है? “नगर निगम प्रशासन जवाब दे कि क्या इस कार्यक्रम की रसीद कटी है? अगर नहीं, तो यह नियमों का खुला उल्लंघन है। या तो निगम सभी के लिए पार्क निशुल्क करे, वरना पक्षपात का यह खेल अब नहीं चलेगा.”
कांग्रेस नेता ने निगम प्रशासन को 2 से 3 दिन का अल्टीमेटम दिया है. मंगू ने साफ कर दिया है कि यदि नियमों में पारदर्शिता नहीं लाई गई और भेदभावपूर्ण रवैया बंद नहीं हुआ, तो नगर निगम कार्यालय का घेराव किया जाएगा और शहर की सड़कों पर उग्र प्रदर्शन होगा.
इस विवाद ने शहर के आम नागरिक को सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या सार्वजनिक संपत्तियों पर सबका बराबर हक नहीं है? क्या नगर निगम के नियम केवल चेहरा देखकर लागू किए जाते हैं?
रीवा नगर निगम के अधिकारी फिलहाल इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन मंगू के तेवरों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिन नगर निगम प्रशासन के लिए मुश्किलों भरे होने वाले हैं.











