एस्ट्रोनॉट से रायपुर की छात्रा ने पूछे रोचक सवाल, बोली– सफलता में मेहनत और किस्मत का कितना योगदान? शुभांशु का जवाब

छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राखी में प्रदेश के पहले अंतरिक्ष केंद्र का शुभारंभ हुआ। अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संयुक्त रूप से अंतरिक्ष केंद्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने विद्यार्थियों से बातचीत की। उन्होंने अंतरिक्ष यात्रा से जुड़े अनुभव साझा किए। बच्चों ने उन्हें देखने और सुनने को लेकर खास रुचि दिखाई। छात्रों ने अंतरिक्ष, पढ़ाई और भविष्य को लेकर कई रोचक सवाल पूछे।

शुभांशु शुक्ला ने सभी प्रश्नों के उत्तर बेहद सरल और सहज भाषा में दिए। एक छात्रा ने ग्रुप कैप्टन से कहा कि वह चंद्रमा पर जाने वाली भारत की पहली नागरिक बनना चाहती है। जबकि दूसरे ने पूछा कि सफलता में मेहनत या किस्मत का कितना योगदान होता है। जिस पर उन्होंने कहा कि किस्मत भी मेहनत से ही बनती है।

“राम-राम छत्तीसगढ़” से की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा, “राम-राम छत्तीसगढ़”। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का भविष्य बहुत उज्ज्वल है और यहां के बच्चों में सीखने की बड़ी चाह है। उन्होंने बताया कि 5 सितंबर 2025 को वे ऑनलाइन माध्यम से भी छत्तीसगढ़ के बच्चों से जुड़े थे। उस समय बच्चों के सवालों से उनकी जिज्ञासा और प्रतिभा साफ दिखाई दी थी।

चंद्रमा पर कैसे जा सकते हैं ?

9वीं की छात्रा किरण भास्कर ने बताया कि वह चंद्रमा पर जाने वाली भारत की पहली नागरिक बनना चाहती है। इस पर शुभांशु शुक्ला ने कहा कि सपना बड़ा हो तो मेहनत भी उतनी ही जरूरी होती है। मन लगाकर पढ़ाई करें, सेहत का ध्यान रखें और अनुशासन में रहें, तभी सपना पूरा होगा।

मेहनत या किस्मत क्या जरुरी

कॉमर्स संकाय की छात्रा काजल साहू ने पूछा कि बड़े सपने क्यों देखने चाहिए और सफलता में मेहनत या किस्मत का कितना योगदान होता है। इस पर शुभांशु शुक्ला ने कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। किस्मत भी मेहनत से ही बनती है।

काजल सवाल पूछने में थोड़ा झिझक रही थीं, तब शुभांशु शुक्ला ने उन्हें शांत होकर आत्मविश्वास के साथ सवाल पूछने को कहा, जिससे दोनों के बीच अच्छा संवाद हुआ।

एस्ट्रोनॉट बनने के लिए अनुशासन जरूरी

मैकेनिकल इंजीनियर प्रीति मंडल के सवाल पर उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष मिशन के लिए मानसिक रूप से मजबूत रहना बहुत जरूरी होता है। कठिन हालात में भी खुद को संभालना और लगातार अभ्यास करना जरूरी है।

एस्ट्रोनॉट बनने के पहले कदम के बारे में उन्होंने कहा कि अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण चीज है। उन्होंने बताया कि बचपन में उन्हें खेल पसंद थे, लेकिन पढ़ाई और खेल दोनों में संतुलन बनाए रखा।

पर्यावरण की जिम्मेदारी हम सबकी

शुभांशु शुक्ला ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पृथ्वी बहुत सुंदर है और इसका संरक्षण करना हम सभी की जिम्मेदारी है। तकनीक के साथ आगे बढ़ते हुए पर्यावरण का ध्यान रखना जरूरी है। छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

320 बार पृथ्वी की परिक्रमा की

अपनी अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव साझा करते हुए सुधाशु ने बताया कि उन्होंने 320 बार पृथ्वी की परिक्रमा की और करीब 1.4 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय की। उन्होंने कहा कि यह यात्रा सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की थी।

उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि छोटे गांव या साधारण स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी एस्ट्रोनॉट बन सकता है, बस लक्ष्य पर ध्यान और मेहनत जरूरी है।

अंतरिक्ष संगवारी एक आंदोलन

कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि प्रोजेक्ट अंतरिक्ष संगवारी अब सिर्फ योजना नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुका है। यह अभियान बच्चों को बड़े सपने देखने की दिशा देगा।

उन्होंने बताया कि रायपुर जिले के 300 से ज्यादा स्कूलों में छात्रों को छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी दी जा चुकी है। अब अंतरिक्ष केवल किताबों में नहीं, बल्कि बच्चों के सामने सजीव रूप में है।

राकेश शर्मा के बाद दूसरे अंतरिक्ष यात्री

शुभांशु शुक्ला तीन अन्य यात्रियों के साथ एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की थी। इसके लिए उन्होंने 25 जून 2025 को उड़ान भरी थी। विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद शुभांशु शुक्ला दूसरे अंतरिक्ष यात्री हैं, जो स्पेस में गए थे।

60 से ज्यादा प्रयोग करने में रहे सफल

शुभांशु शुक्ला ने स्पेस से 14 जुलाई को पृथ्वी पर लौटे थे। उन्होंने करीब 20 दिनों का समय वहां बिताया था। स्पेस में रहने के दौरान उन्होंने 60 से ज्यादा प्रयोग किए थे। जिनमें जैवचिकित्सा विज्ञान, तंत्रिका विज्ञान, कृषि, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री विज्ञान जैसे विविध क्षेत्र शामिल हैं।

लखनऊ के रहने वाले हैं शुभांशु

शुभांशु शुक्ला मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं। 12वीं के बाद उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) का एंट्रेंस एग्जाम क्लियर किया और यहीं से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। शुभांशु साल 2006 में भारतीय एयरफोर्स में शामिल हुए थे। साल 2019 उन्हें गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुना गया था।

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