510 करोड़ की रतनपुर-पेंड्रा सड़क पहली बारिश में उखड़ी, जगह-जगह दरारें और धंसाव से गुणवत्ता पर उठे सवाल

बिलासपुर जिले में रतनपुर से पेंड्रा तक बन रही 97 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग-45 परियोजना पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 510 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस सड़क पर कई स्थानों पर लंबी-लंबी दरारें पड़ गई हैं, जबकि कई हिस्सों में सड़क धंसने और किनारे टूटने की स्थिति सामने आई है। निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही सड़क की खराब हालत ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की गई है। उनका कहना है कि मजबूत आधार तैयार किए बिना मिट्टी के ऊपर डामर की परत बिछा दी गई, जिसके कारण बारिश होते ही सड़क में दरारें पड़ने लगीं। कई जगहों पर दरारें इतनी चौड़ी हैं कि उनमें पैर तक धंस जा रहा है। लोगों ने इसे भ्रष्टाचार और लापरवाही का परिणाम बताते हुए निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है।
यह सड़क बिलासपुर, रतनपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही क्षेत्र को जबलपुर और अमरकंटक से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में सड़क की वर्तमान स्थिति से स्थानीय लोगों और राहगीरों में हादसे की आशंका बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं दिखाई दे रही है।
जानकारों के अनुसार सड़क निर्माण में भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। सड़क की मजबूत नींव तैयार करने के लिए मिट्टी, मुरूम, गिट्टी और उचित कम्पेक्शन का विशेष ध्यान रखा जाता है। यदि इन मानकों का पालन नहीं किया जाए तो बारिश के दौरान सड़क के धंसने और डामर में दरारें आने की संभावना बढ़ जाती है।
गौरतलब है कि 17 जून 2026 को लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश बंसल ने निर्माणाधीन सड़क का निरीक्षण कर अधिकारियों और ठेकेदार को सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे पहले लोक निर्माण मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी परियोजना का निरीक्षण कर चुके हैं।
सड़क निर्माण का कार्य तीन चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में रतनपुर से केंदा, दूसरे चरण में कारीआम से केंवची तक निर्माण जारी है, जबकि तीसरे चरण में घाटी और पहाड़ी क्षेत्र का कार्य प्रस्तावित है, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
मामले पर कार्यपालन अभियंता आर.के. खांबरा ने कहा कि सड़क पर दरारों और धंसाव की शिकायतों की जानकारी मिलने पर वे स्वयं मौके का निरीक्षण करेंगे। यदि कहीं निर्माण संबंधी खामियां पाई जाती हैं तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।











