सिद्धिविनायक मंदिर के अधिकारी पर घपले का आरोप, जांच आदेश जारी, जवाब देने को 7 दिन

महाराष्ट्र के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में प्रशासनिक स्तर पर घोटाला करने का आरोप लगा है. मंदिर ट्रस्ट के कुछ विश्वस्तों ने कार्यकारी अधिकारी और उप कार्यकारी अधिकारी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है.
सूत्रों के मुताबिक, विश्वस्तों ने इस संबंध में विधि व न्याय विभाग को पत्र लिखकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है. विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है.
विभाग की ओर से कार्यकारी अधिकारी विणा पाटील और उप कार्यकारी अधिकारी संदीप राठोड़ को 7 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं. इस आदेश के बाद मंदिर प्रशासन में हलचल तेज हो गई है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मंदिर के ही विश्वस्तों द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं. दो विश्वस्तों के अलावा तीन अन्य शिकायतकर्ताओं ने भी अधिकारियों पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. इससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर मंदिर के भीतर चल क्या रहा है.
जांच के लिए विधि व न्याय विभाग ने इन जरूरी दस्तावेजों की जानकारी मांगी है…
- टेंडर (निविदा) से जुड़े सभी कागजात
- टेंडर से जुड़ी बैठकों की रिपोर्ट (मिनट्स)
- ट्रस्ट बोर्ड द्वारा लिए गए फैसलों का रिकॉर्ड
- जारी किए गए सभी प्रशासनिक आदेश
- भोजन/महाप्रसाद से जुड़े ठेकों की जानकारी
जांच के तहत विधि व न्याय विभाग ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तलब किए हैं, जिनमें निविदा से जुड़े कागजात, निविदा उपसमिति की बैठक के इतिवृत्त, ट्रस्ट बोर्ड के फैसले, जारी किए गए प्रशासनिक आदेश और भोजन/महाप्रसाद से जुड़े ठेके शामिल हैं.
इन सभी की विस्तृत जानकारी मांगी गई है. कुछ ही दिनों पहले मंदिर के 8 कर्मचारियों को चोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था. ऐसे में लगातार सामने आ रहे मामलों से मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं.











