हाईकोर्ट ने तलाक मामले में फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दोबारा सुनवाई के दिए निर्देश

पति द्वारा पत्नी पर वीडियो कॉल में न्यूड होकर बात करने का आरोप लगाकर दायर तलाक याचिका मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महासमुंद फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त कर मामले की दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि बेडरूम में लगे CCTV कैमरों की फुटेज वाली सीडी को रिकॉर्ड पर लिया जाए।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि फैमिली कोर्ट केवल इस आधार पर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य खारिज नहीं कर सकता कि उनके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B का प्रमाणपत्र नहीं है। फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 14 और 20 के तहत फैमिली कोर्ट को किसी भी विवाद के प्रभावी निपटारे के लिए किसी भी दस्तावेज या साक्ष्य को स्वीकार करने का अधिकार है, भले ही वह तकनीकी रूप से सभी कानूनी शर्तें पूरी न करता हो।
महिला का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद पति ने अतिरिक्त पैसे की मांग शुरू कर दी और उत्पीड़न किया। पति ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बेडरूम में बिना बताए CCTV कैमरे लगवा दिए। विरोध करने पर मारपीट की और घर से निकालने की धमकी दी।
पति ने पत्नी पर क्रूरता और अन्य पुरुषों के साथ अश्लील चैटिंग का आरोप लगाते हुए तलाक की याचिका दायर की और आरोपों के समर्थन में बेडरूम में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की सीडी फैमिली कोर्ट में पेश की। महासमुंद फैमिली कोर्ट ने तलाक याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि सीडी के साथ धारा 65-B का प्रमाणपत्र नहीं है, इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं पत्नी की दांपत्य अधिकारों की बहाली की याचिका स्वीकार कर ली गई थी।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर मामले की पुनः सुनवाई का निर्देश दिया और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को रिकॉर्ड पर लेने का आदेश पारित किया। यह फैसला फैमिली कोर्ट मामलों में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की स्वीकार्यता के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है।











