तेल कीमतों में बड़ी नरमी: अगस्त तक मिल सकती है आम जनता को ईंधन राहत

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट के बाद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होने की उम्मीद बढ़ गई है। वेस्ट एशिया में तनाव के दौरान 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचा क्रूड ऑयल अब 40 फीसदी से अधिक टूट चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य बने रहे तो जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती संभव है।
नयारा एनर्जी ने दी राहत
देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन रिटेलर कंपनियों में शामिल नयारा एनर्जी ने 1 जुलाई से पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी है। कंपनी के देशभर में 7,000 से अधिक पेट्रोल पंप हैं। यह कटौती मार्च में की गई मूल्य वृद्धि को वापस लेने के रूप में देखी जा रही है, जब वेस्ट एशिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई थीं।
हालांकि, सरकारी तेल कंपनियां – इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम – ने अभी तक खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। देश के 90 प्रतिशत से अधिक पेट्रोल पंप इन्हीं कंपनियों के नियंत्रण में हैं
एलपीजी और एटीएफ भी हुए सस्ते
तेल विपणन कंपनियों ने 1 जुलाई से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 173 से 184 रुपये तक की कटौती की है। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत घटकर 2,930 रुपये रह गई है। वहीं घरेलू 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
इसके अलावा विमानन क्षेत्र को भी राहत मिली है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत में करीब 5 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है, जिससे एयरलाइंस की परिचालन लागत कम होने की उम्मीद है।
तुरंत राहत क्यों नहीं मिल रही?
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं। इसमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, टैक्स, डॉलर-रुपया विनिमय दर और तेल कंपनियों का मार्जिन भी शामिल होता है।
इसके अलावा भारतीय रिफाइनरियां कई सप्ताह पहले किए गए अनुबंधों के तहत खरीदे गए महंगे कच्चे तेल का इस्तेमाल कर रही हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने के बावजूद उसका पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में दो से चार सप्ताह का समय लग सकता है।
अगस्त तक हो सकती है कटौती
एनर्जी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बना युद्धविराम कायम रहता है और क्रूड ऑयल की कीमतों में और उछाल नहीं आता, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक की कमी की जा सकती है।
हालांकि सरकार और तेल कंपनियां संभवतः सीमित कटौती का विकल्प चुनेंगी ताकि हालिया संकट के दौरान हुए नुकसान की भरपाई हो सके और राजस्व पर भी अधिक असर न पड़े।
महंगाई पर पड़ेगा असर
ईंधन की कीमतों में संभावित कमी का सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है। परिवहन लागत घटने से खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर दबाव कम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी सरकार को महंगाई नियंत्रित रखने और आम लोगों को राहत देने का अवसर प्रदान कर सकती है।











