रिश्वतखोरी पर लगाम नहीं: उज्जैन लोकायुक्त ने देवास में CEO को 20,000 की रिश्वत लेते रंगेहाथ दबोचा!

ग्वालियर/मध्य प्रदेश में शासकीय सेवकों द्वारा रिश्वतखोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, भले ही उन्हें अच्छा खासा वेतन मिलता हो। लोकायुक्त संगठन लगातार ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कस रहा है।

पिछले तीन दिनों में ही ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन लोकायुक्त पुलिस की टीमों ने चार रिश्वतखोरों को रंगेहाथ पकड़ा है, जो इस बात का प्रमाण है कि सख्त कार्रवाई के बावजूद कुछ शासकीय सेवक अपनी बुरी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

इसी कड़ी में, आज उज्जैन लोकायुक्त पुलिस की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए देवास जिले की जनपद पंचायत टोंकखुर्द के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) राजेश सोनी को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है।

यह कार्रवाई तब हुई जब देवास जिले के सोनसर तहसील टोंकखुर्द निवासी रोजगार सहायक कृष्ण पाल सिंह ने उज्जैन लोकायुक्त एसपी ऑफिस में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायतकर्ता कृष्ण पाल सिंह ने 29 सितंबर को अपनी शिकायत में बताया था कि जनपद पंचायत टोंकखुर्द के सीईओ राजेश सोनी उनसे ग्राम पंचायत नावदा में उनका तबादला करने के एवज में 20,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत मिलते ही उज्जैन लोकायुक्त एसपी आनंद यादव के निर्देश पर इंस्पेक्टर दीपक सेजवार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत की सत्यता की जांच शुरू की।

जांच के दौरान, सीईओ राजेश सोनी द्वारा रोजगार सहायक से रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हो गई। पुष्टि होने के बाद, लोकायुक्त टीम ने एक ट्रैप प्लान तैयार किया।

10 अक्टूबर को लोकायुक्त की टीम देवास पहुंची और योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया। शिकायतकर्ता कृष्णपाल सिंह को रिश्वत की राशि 20,000 रुपये के साथ जनपद पंचायत टोंकखुर्द के कार्यालय में सीईओ राजेश सोनी के पास भेजा गया। जैसे ही कृष्णपाल सिंह ने रिश्वत की रकम सीईओ को दी, बाहर इंतजार कर रही उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राजेश सोनी को रंगेहाथ दबोच लिया। यह कार्रवाई एक बार फिर यह दिखाती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन पूरी तरह मुस्तैद है और भ्रष्ट अधिकारियों पर लगातार शिकंजा कस रहा है।