अब अशफाक उल्ला खान के नाम से जाना जाएगा टीपू सुल्तान चौक, बीजेपी के प्रस्ताव को मिला बहुमत

मीरा भयंदर महानगरपालिका ने टीपू सुल्तान चौक का नाम बदलकर अशफाक उल्ला खान चौक कर दिया है.बीजेपी के प्रस्ताव को बहुमत से मंजूरी मिली. यह फैसला टीपू सुल्तान को लेकर महाराष्ट्र में चल रहे सियासी विवाद के बीच आया है.
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंतर्गत आने वाले मीरा-भयंदर नगर निगम (MBMC) ने मीरा रोड स्थित नया नगर स्थित ‘हजरत टीपू सुल्तान चौक’ का नाम बदलने का प्रस्ताव बहुमत से मंज़ूर कर दिया है. नव निर्वाचित बीजेपी पार्षद टीपू सुल्तान चौक का नाम बदलने की लगातार मांग कर रहे थे. इसको लेकर काफी बवाल भी हो रहा था. हालांकि अब इस चौक को महान स्वतंत्रता सेनानी अशफाक उल्ला खान के नाम से जाना जाएगा.
इस बीच बुधवार को टीपू सुल्तान चौक का नाम बदलने का प्रस्ताव बहुमत के से मंजूर हो गया गया. ठाणे के मीरा भयंदर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में BJP के द्वारा लाए प्रस्ताव को सदन में बहुमत से मंजूरी मिल गई. वहीं विरोध कर रही कांग्रेस ने भी टीपू सुल्तान के मुद्दे पर यू-टर्न ले लिया है.
अशफाक उल्ला खान नया नाम
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस ने ‘हज़रत टीपू सुल्तान चौक’ का नाम बदलकर अब्दुल गफ्फार करने का सुझाव दिया था. लेकिन बहुमत बीजेपी के पक्ष में होने की वजह से उनके द्वारा प्रस्तावित नाम पर मुहर लगी. ऐसे में अब टीपू सुल्तान चौक का नाम बदलकर अशफाक उल्ला खान हो जाएगा.

कैसे शुरू हुआ विवाद
दरअसल टीपू सुल्तान को लेकर विवाद की शुरुआत नासिक के मालेगांव नगर निगम से हुई थी. समाजवादी पार्टी की नेता और डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद द्वारा अपने सरकारी कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाई थी,जिस पर प्रशासन ने आपत्ति जताते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था.

बीजेपी और शिंदे ने की निंदा
प्रशासनिक की इस कार्रवाई ने उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी. जिसके बाद महाराष्ट्र की सियासत में बवाल मच गया. सत्ताधारी बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने इसे महाराष्ट्र की अस्मिता और शिवाजी महाराज का घोर अपमान बताया. वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे एक प्रचार और महापुरुषों का अपमान करार दिया. इस मामले को लेकर कई शहरों में विरोध प्रदर्शन भी किए गए.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मांगी माफी
मामले के तूल पकड़ने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने माफी मांग ली है. उन्होंने कहा कि उनका कभी भी लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था.सपकाल ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया. सपकाल ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता और स्वराज्य की अवधारणा का उल्लेख करते हुए अंग्रेजों के विरुद्ध टीपू सुल्तान के आह्वान का उदाहरण दिया था. उन्होंने कहा कि यह तुलना नहीं थी. बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं ने बयान को ने गलत इरादे से कैंपेन चलाकर प्रसारित किया और समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश की.

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