सुपौल में दो लाख किसान सम्मान योजना के लाभ से हो सकते वंचित, जल्द करें ये काम

सुपौल : जिले के शत-प्रतिशत किसान खासकर पीएम किसान सम्मान निधि योजना से लाभान्वित किसानों के फार्मर आईडी बनाये जाने को लेकर कृषि और राजस्व विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जनवरी माह में ही दो बार विशेष अभियान का आयोजन हाथी के दांत साबित हो गया. एक ही माह में दो बार विशेष अभियान चलाए जाने के बाद भी पीएम किसान योजना से आच्छादित 25 फीसद किसानों का भी फार्मर आईडी नहीं बन सका है. हालांकि किसानों के ई केवाईसी किये जाने का मामले में स्थिति कुछ बेहतर है. अब सवाल उठता है कि जब विशेष अभियान चलाए जाने के बाद भी सभी किसानों का फार्मर आईडी नहीं बन सका तो फिर क्या ऐसे किसान पीएम किसान सम्मन निधि योजना से वंचित हो जाएंगे. हालांकि विभाग का साफ तौर पर कहना है कि जिन किसानों का फार्मर आईडी नहीं बन पाएगा वैसे किसान योजना के तहत दिए जाने वाले 22 वीं किस्त से वंचित हो सकते हैं. जिले में 2 लाख 72 हजार 352 किसान प्रधानमंत्री सम्मान निधि का लाभ प्राप्त कर रहे हैं. दो अभियान बीत जाने के बाद इसमें से मात्र 61 हजार 417 किसानों का ही फार्मर रजिस्ट्रेशन हो सका है. जबकि ई-केवाईसी एक लाख 73 हजार 316 किसानों का पूरा किया जा सका है. इस तरह देखें तो सरकार के इस महत्वपूर्ण अभियान में राजस्व विभाग की उदासीनता दिखाई दे रही है. दरअसल कृषि विभाग को ई-केवाईसी तथा राजस्व विभाग को फार्मर आईडी बनाने का जिम्मा था. परंतु राजस्व विभाग ने यहां भी कंजूसी बरती. परिणाम है कि फार्मर आईडी जेनरेट में जिले का ग्राफ काफी नीचे है. यदि स्थिति यही रही तो किसानों का एक बड़ा तबका पीएम किसान योजना से वंचित हो जाएंगे. फार्मर आईडी के लिए किसानों को ई केवाईसी तथा किसान निबंधन आवश्यक है. इसी आधार पर किसानों को सम्मान निधि और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त होगा. ई केवाईसी तो आसानी से हो रहा है परंतु स्वयं के नाम पर जमाबंदी नहीं रहने से किसान रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है. जबकि पुरखो के नाम जमीन को स्वयं के नाम करने को लेकर रैयत कार्यालय का चक्कर काटते थक जाते हैं लेकिन यह संभव नहीं हो पाता. पिछले दिनों सरकार ने भी अभियान चलाकर किसानों से आवेदन लिए लेकिन आज तक इस आवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकी परिणाम है कि जिले में आज भी बाप दादा के नाम जमाबंदी चल रही है

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