रायपुर में नाबालिग से तीन साल तक दुष्कर्म, बच्चा डेढ़ लाख में बेचने का आरोप; पिता-बुआ समेत 9 गिरफ्तार

रायपुर में 16 वर्षीय नाबालिग से करीब तीन साल तक दुष्कर्म और उसके नवजात बच्चे को बेचने का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, मामले में नाबालिग के पिता और बुआ समेत 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में नाबालिग की उम्र छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने, अस्पताल में डिलीवरी कराने और नवजात को दूसरे व्यक्ति को सौंपने की कड़ी सामने आई है।
तीन साल तक शोषण का आरोप
नाबालिग ने 17 अगस्त को अपनी मां और मामा के साथ राजेंद्र नगर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उसने आरोप लगाया कि करीब तीन साल पहले उसके पिता उसे एक कमरे में ले गए, शराब पिलाई और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद किसी को घटना बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
पुलिस के अनुसार, नाबालिग ने बाद में अपनी बुआ को घटना की जानकारी दी, लेकिन आरोप है कि बुआ ने भी अपने भाई का साथ दिया। इस दौरान नाबालिग दो बार गर्भवती हुई। पहली बार उसे दवा खिलाकर गर्भपात कराने का आरोप है। दूसरी बार गर्भपात का समय निकल जाने के बाद उसकी डिलीवरी कराई गई और उसने एक बेटे को जन्म दिया।
छोटी बहनों को भी दुष्कर्म की धमकी
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसके माता-पिता करीब पांच साल पहले अलग हो गए थे। इसके बाद पिता उसे बिलासपुर से रायपुर ले आए। उसकी दो छोटी बहनें भी हैं, जिनकी उम्र 9 और 11 साल बताई गई है।
आरोप है कि जब नाबालिग अपने पिता का विरोध करती थी तो उसे धमकी दी जाती थी कि यदि उसने बात नहीं मानी तो उसकी छोटी बहनों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया जाएगा। बहनों को बचाने और उनकी पढ़ाई प्रभावित न होने देने के डर से वह लंबे समय तक चुप रही।
फर्जी आधार कार्ड से नाबालिग को बालिग दिखाने का आरोप
पुलिस की जांच में सामने आया कि नाबालिग की गर्भावस्था की जानकारी मिलने के बाद पिता ने एक गार्ड से संपर्क किया। इसके बाद अस्पताल से जुड़े एक व्यक्ति और उसकी पत्नी के माध्यम से अन्य लोगों तक बात पहुंची।
जांच के मुताबिक, इस कड़ी में रायपुर के एक IVF सेंटर में काम करने वाली महिला का नाम भी सामने आया। पुलिस का कहना है कि उसने आगे एक अन्य महिला से संपर्क किया, जिसके माध्यम से फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की व्यवस्था की गई।
आरोप है कि नाबालिग के आधार कार्ड में फोटोशॉप के जरिए उसकी जन्मतिथि बदलकर उसे बालिग और शादीशुदा दिखाया गया। इसके बाद इसी फर्जी पहचान के आधार पर उसे डंगनिया स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी डिलीवरी कराई गई।
डिलीवरी के बाद नवजात को सौंपने की कड़ी सामने आई
पुलिस के अनुसार, डिलीवरी के बाद नवजात को कुछ दिनों तक एक महिला ने अपने पास रखा। इसके बाद बच्चे को दूसरे लोगों के माध्यम से आगे सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई।
जांच में आरोप है कि नवजात को करीब डेढ़ लाख रुपए में देने का सौदा तय हुआ। रकम UPI के जरिए ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि डिलीवरी के करीब 20 दिन बाद फर्जी दस्तावेज और लिखापढ़ी के जरिए नवजात को दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया गया।
पिता-बुआ समेत 9 आरोपी गिरफ्तार
मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने नाबालिग से पूछताछ और उसकी जानकारी के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर जांच की। पुलिस के मुताबिक, नाबालिग ने उन जगहों और लोगों के बारे में जानकारी दी, जहां उसे ले जाया गया था।
जांच के आधार पर पुलिस ने नाबालिग के पिता और बुआ समेत कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। रायपुर पश्चिम के डीसीपी रॉबिंसन गुड़िया के मुताबिक, मामले की जांच अभी जारी है।
IVF सेंटर और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले की भूमिका की जांच
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि IVF सेंटर में काम करने वाली महिला की इस पूरे मामले में क्या भूमिका थी। इसके अलावा फर्जी आधार कार्ड तैयार करने वाले व्यक्ति ने इससे पहले कितने लोगों के दस्तावेजों में इसी तरह छेड़छाड़ की है, इसकी भी जांच की जा रही है।
मामले में पुलिस नवजात को बेचने की पूरी कड़ी, पैसों के लेनदेन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।











