फुटपाथ कारोबारियों में हड़कंप: नोटिस के बाद बंद हुआ व्यवसाय, सही जानकारी न मिलने पर नाराजगी बढ़ी

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेन्द्रगढ़ मुख्यालय में फुटपाथ पर ठेला लगाकर व्यवसाय करने वाले व्यापारियों के बीच हाल ही में नगर पालिका द्वारा जारी नोटिस के बाद अफरातफरी मच गई है। 14 नवंबर को जारी इस नोटिस में सड़क किनारे दुकानों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए, जिसके बाद कई व्यापारी पिछले चार दिनों से अपना कारोबार बंद करने को मजबूर हैं। इससे उनके परिवार की आजीविका पर सीधा संकट खड़ा हो गया है।
नगर पालिका का तर्क है कि सड़क किनारे लगने वाले ठेले यातायात में बाधा बनते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाते हैं। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि निर्देशों का पालन न करने पर सामान जब्त कर लिया जाएगा। जब व्यापारी इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण लेने नगर पालिका कार्यालय पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि यह कार्रवाई जिला कलेक्टर के आदेश पर की जा रही है।
व्यापारी जब कलेक्टर कार्यालय पहुंचे तो उन्हें आवेदन लेने से मना कर दिया गया। कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों ने मौखिक रूप से कहा कि फुटपाथ दुकानें हटाने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है और व्यापारी वहीं जाकर अपनी समस्या रखें। इस व्यवहार से फुटपाथ कारोबारी बेहद निराश और आक्रोशित हैं।
व्यापारियों का कहना है कि अचानक दुकानें हटवा देने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कई व्यापारियों ने बताया कि नोटिस देने आए कर्मचारियों ने उन्हें अस्थायी रूप से भूपेंद्र क्लब में ठेला लगाने की बात कही थी, लेकिन वहां पहुंचने पर नगर पालिका ने उन्हें वहां से भी हटा दिया। इस वजह से व्यापारी उलझन में हैं कि आखिर वे अपने ठेले कहां लगाएं।
फुटपाथ दुकानदारों ने प्रशासन से वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वे बिना परेशानी अपना व्यवसाय जारी रख सकें। उनका कहना है कि अचानक हटाने की कार्रवाई से परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और बच्चे तक प्रभावित हो रहे हैं।
अब सवाल यह है कि प्रशासन इन छोटे व्यापारियों के लिए क्या समाधान निकालता है। व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें ऐसी जगह मिले जहां वे सुरक्षित और बिना बाधा के अपना काम जारी रख सकें, ताकि उनकी आजीविका पर कोई असर न पड़े।










