महाराष्ट्र यूसीसी पैनल से रिटायर्ड जज का इस्तीफा, भड़की कांग्रेस बोली- UCC विभाजन का औजार

महाराष्ट्र यूसीसी पैनल से रिटायर्ड जज के इस्तीफे पर सियासी घमासान शुरू हो गया है. कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस ने यूसीसी को विभाजन और ध्यान भटकाने का एक औजार बताया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया (X) पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है, जिसमें उन्होंने कई बातों का जिक्र किया है.
जयराम रमेश ने कहा, महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित राज्य सरकार की समिति से हाई कोर्ट के एक पूर्व जज के इस्तीफे ने कई बड़े सवाल खड़े किए हैं. इसके अलावा उन्होंने इस समिति के कामकाज को लेकर भी कई चिंताएं जताई हैं. उन्होंने कहा कि क्या संविधान सभा ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना की थी, जिसमें हर राज्य अपना अलग-अलग समान नागरिक संहिता (UCC) बनाए? इसका जवाब है-बिल्कुल नहीं.
A retired High Court judge has shown courage to resign from a committee set up by the Maharashtra government to prepare a uniform civil code for the state. Here is our statement on the non-uniform Uniform Civil Codes (UCC) the HM is trying to bulldoze through in every state. pic.twitter.com/oxsyCrEmLx
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 23, 2026
कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा कि पिछले तीन वर्षों में एक के बाद एक बीजेपी शासित राज्यों ने यूसीसी के अपने-अपने वर्जन जबरन पारित कराए हैं. उत्तराखंड में UCC 27 जनवरी 2025 से लागू हुआ. इसके बाद गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को, असम विधानसभा ने 27 मई 2026 को और मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई 2026 को UCC विधेयक पारित किया. ये राज्य-स्तरीय UCC, जिनकी संविधान में कभी कल्पना नहीं की गई थी, एक जैसे भी नहीं हैं. इनमें अलग-अलग प्रावधान, अलग-अलग दंड, अलग-अलग प्रक्रियाएं और कई महत्वपूर्ण छूट हैं. दावों के उलट, उत्तराखंड का UCC-जो फिलहाल लागू होने वाला एकमात्र UCC है-कई पितृसत्तात्मक परंपराओं को अब भी जारी रखता है और राज्य में कानून का पूरी तरह पालन करने वाले निवासियों के लिए नेवासियों के लिए भी कई तरह की समस्याएं पैदा कर रहा है.
‘UCC विभाजन और ध्यान भटकाने का एक औजार’
केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित सभी राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा. ऐसा लगता है कि NDA के बाकी दलों की आवाज दबा दी गई है भाजपा उन्हें चुप करा रही है. मोदी सरकार के लिए UCC कोई ऐसा कानूनी सुधार नहीं है, जिसे पूरी तरह सोच-विचार के बाद, ज्यादा से ज्यादा व्यापक विचार-विमर्श और सार्वजनिक बहस के जरिए और अधिकतम संभव सहमति के साथ लागू किया जाए. असल में यह विभाजन, व्यवधान और ध्यान भटकाने का एक औजार है. लोगों को परेशान करने और डराने का एक माध्यम है. पूर्वाग्रहों को भड़काने और समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में बनाए रखने का एक साधन है.











