आयुक्तों में असहमतियों पर बोला चुनाव आयोग- ये प्रक्रिया का हिस्सा लेकिन सभी फैसले सहमति से

चुनाव आयोग को लेकर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के बाद विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव बढ़ गया है. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग को हाईजैक करने का आरोप लगाया. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि असहमतियां प्रक्रिया का हिस्सा हैं लेकिन सारे फैसले सहमति से लिए गए हैं.
चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग एक संवैधानिक संस्था है और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करता है, आयोग के मुताबिक, उसके भीतर लिखित नोट, आपसी चर्चा और आंतरिक चेक एंड बैलेंस की व्यवस्था सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय आना सामान्य बात है. आयोग के मुताबिक, निर्णय लिए जाने से पहले अधिकारी और सदस्य अपने सवाल, सुझाव या आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं.
आंतरिक नोट्स दिखाना पूरी तस्वीर नहीं
चुनाव आयोग ने साफ किया कि तीनों चुनाव आयुक्तों में से प्रत्येक को सुझाव देने और अपनी राय रखने का अधिकार है, इसलिए आंतरिक चर्चा के दौरान सामने आई अलग-अलग राय को अंतिम फैसले से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा. आयोग ने कहा कि पिछले 10 महीनों के केवल कुछ आंतरिक नोट्स को सामने रखकर बाकी फैसलों और कामकाज को नजरअंदाज करना पूरी तस्वीर पेश नहीं करता.
चुनाव आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 40 नई पहल और कई चुनाव सुधार किए गए हैं, इनमें पूरे देश में लागू किया गया विशेष गहन पुनरीक्षण यानी भी शामिल है. आयोग का दावा है कि ये सभी फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं.
सभी आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत
चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक आदेशों और फैसलों को लेकर भी सफाई दी. चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेश और फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं. आयोग ने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 324 के साथ-साथ The Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 का हवाला दिया. आयोग का कहना है कि आंतरिक स्तर पर किसी प्रस्ताव या ड्राफ्ट पर सवाल उठना और अंतिम निर्णय के बीच अंतर समझना जरूरी है… अंतिम आदेश निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही जारी किए जाते हैं.











