धमतरी के ‘डायमंड’ ने बिखेरी सफलता की आभा: UPSC में लहराया परचम, बिना कोचिंग के हासिल की 623वीं रैंक

धमतरी: कहते हैं कि संकल्प की ऊर्जा यदि प्रबल हो, तो साधारण पृष्ठभूमि से निकला व्यक्तित्व भी सफलता के आकाश में ध्रुव तारे की तरह चमकने लगता है. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के अंतर्गत आने वाले छोटे से ग्राम परसवानी के होनहार युवा डायमंड सिंह ध्रुव ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 623वीं रैंक प्राप्त कर इस उक्ति को चरितार्थ कर दिया है. उनकी इस उपलब्धि ने न केवल धमतरी की माटी का मान बढ़ाया है, बल्कि समूचे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय लिख दिया है.

​विरासत में मिला अनुशासन और शिक्षा का संस्कार

​डायमंड की यह यात्रा केवल व्यक्तिगत पुरुषार्थ की कहानी नहीं है, बल्कि एक शिक्षक परिवार के मूल्यों की विजय है. उनकी माता अंबिका सूर्यवंशी, जो स्वयं एक शिक्षिका हैं, ने परिवार में सदैव शिक्षा और अनुशासन की लौ को प्रज्ज्वलित रखा. उनके पिता, स्वर्गीय बलराम सिंह सूर्यवंशी (जनपद पंचायत में करारोपण अधिकारी), जिनका साया अप्रैल 2025 में असमय उठ गया था, हमेशा उनके मार्गदर्शक रहे. पिता के निधन की वज्रपात जैसी व्यक्तिगत क्षति के बाद भी डायमंड ने अपनी मानसिक दृढ़ता को बनाए रखा और अपनी इस ऐतिहासिक सफलता से उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की.

​स्वाध्याय की शक्ति: बिना कोचिंग के रची इबारत

​आज के दौर में जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महानगरों के महंगे कोचिंग संस्थानों की शरण ली जाती है, वहीं डायमंड ने ‘स्वाध्याय’ (Self-Study) के मंत्र को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. दिल्ली के एकांत में रहकर उन्होंने ढाई वर्षों तक अविराम कड़ा परिश्रम किया. उनकी सफलता का ग्राफ निरंतर ऊर्ध्वगामी रहा है; वर्ष 2024 में उन्होंने CGPSC में 13वीं रैंक प्राप्त कर राज्य पुलिस सेवा (DSP) में अपनी जगह बनाई थी, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य देश की सेवा का सर्वोच्च सोपान था.

​IPS बनने की प्रबल संभावना और उज्ज्वल भविष्य

​अनुसूचित जनजाति श्रेणी और उनकी उत्कृष्ट रैंक के आधार पर यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित होंगे. एक साधारण शिक्षिका का बेटा अब खाकी वर्दी पहनकर देश की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा. उनकी इस सफलता की गूंज अब परसवानी से लेकर राजधानी तक सुनाई दे रही है.

​आज के युवा पीढ़ी को डायमंड सिंह ध्रुव की सफलता यह संदेश देती है कि संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन दृष्टि और संकल्प असीमित होने चाहिए. उनकी जीत धमतरी के हर उस युवा की जीत है जो अभावों के बीच भी आकाश छूने का साहस रखता है.

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