मुंबई में फेरीवालों को राहत: QR कोड सत्यापन की समयसीमा बढ़ी, अब 26 जून तक होगा वेरिफिकेशन

बीएमसी ने मुंबई के फेरीवालों के पंजीकरण सत्यापन की समयसीमा बढ़ाकर 26 जून कर दी है। पहले यह प्रक्रिया 15 जून तक पूरी की जानी थी, लेकिन अब तक केवल 28 हजार फेरीवालों ने अपने पंजीकरण का सत्यापन कराया है।
शहर में कुल 99,345 पंजीकृत फेरीवालों को क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र जारी किए जाने हैं। बीएमसी का मानना है कि क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्रों से अधिकृत और अवैध फेरीवालों के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सकेगा।
इससे सड़कों और फुटपाथों पर अवैध अतिक्रमण हटाने में मदद मिलेगी तथा पैदल यात्रियों के लिए सार्वजनिक स्थान अधिक सुरक्षित और सुगम बन सकेंगे। बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, पंजीकरण सत्यापन प्रक्रिया 5 जून से शुरू हुई थी। सभी पंजीकृत फेरीवालों को संबंधित वार्ड कार्यालयों में बुलाकर उनके नाम, सर्वेक्षण संख्या, व्यवसाय स्थल और क्षेत्राधिकार की पुष्टि की जा रही है।
सबसे अधिक सत्यापन दादर में
अब तक सबसे अधिक सत्यापन दादर में हुआ है, जबकि कोलाबा, चर्चगेट और गोरेगांव क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में फेरीवालों ने प्रक्रिया पूरी की है। अधिकारियों का कहना है कि कई पंजीकृत फेरीवाले फिलहाल शहर से बाहर हैं। इसलिए उन्हें लौटने का समय देने के लिए समयसीमा बढ़ाई गई है।
क्यूआर कोड स्कैन करते ही बीएमसी और मुंबई पुलिस को तुरंत यह जानकारी मिल सकेगी कि संबंधित फेरीवाला वैध है या नहीं। इससे अवैध फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई आसान हो जाएगी। पहचान पत्र जारी होने के बाद फेरीवालों को निर्धारित व्यापार स्थल (हॉकिंग पिच) आवंटित किए जाएंगे। यह कार्य टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) करेगी।
नगरसेवक ने उठाए थे सवाल
बीजेपी नगरसेवक तेजिंदर सिंह तिवाना ने स्थायी समिति में क्यूआर कोड देने पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध लग सकती है। इसलिए क्यूआर कोड देने से पहले व्यापक जांच पड़ताल करना चाहिए। वहीं शिवसेना शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने कहा था कि ज्यादातर – फेरीवाले उत्तर भारतीय हैं, ऐसे में बीएमसी की तरफ से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।











