17 करोड़ के फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले में कार्रवाई तेज, तीन लिपिक निलंबित; कर्मचारी संगठनों ने दी सामूहिक अवकाश की चेतावनी

बिलासपुर में सामने आए 17 करोड़ रुपये के कथित फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच तेज हो गई है। मामले में गिरफ्तार किए गए तहसील कार्यालय के तीन राजस्व लिपिकों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि आठ अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। इस बीच कर्मचारियों की गिरफ्तारी के विरोध में राजस्व लिपिक संघ और कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है और सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी है।
पुलिस ने तहसील कार्यालय के कर्मचारी गरीब बिंझवार, नरेंद्र कौशिक और हरिराम राठौर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले गोविंद विश्वकर्मा, वकील खांडेकर और डॉ. प्रियंका सोनी की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियां अब मामले से जुड़े अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की तैयारी कर रही हैं।
गिरफ्तार कर्मचारियों के समर्थन में तहसील कार्यालय के कर्मचारियों ने एक दिन की हड़ताल की, जिससे सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा सहित कई राजस्व कार्य प्रभावित रहे। दूर-दराज से पहुंचे लोगों को बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा। तहसीलदार अदालत में मौजूद रहे, लेकिन कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण फाइलों पर सुनवाई नहीं हो सकी।
जांच आगे बढ़ने के साथ कई कर्मचारी संभावित कार्रवाई से बचने के लिए तबादले की कोशिश में जुट गए हैं। दूसरी ओर सात तहसीलदारों को नोटिस जारी किए जाने के बाद कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने भी उनका पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है।
राजस्व लिपिक संघ का आरोप है कि तीन कर्मचारियों को पहले बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। संघ का कहना है कि अब आठ अन्य लिपिकों को भी बयान के लिए नोटिस दिया गया है, जिससे कर्मचारियों में भय का माहौल है। संगठन ने मांग की है कि पूरी जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और दोष तय होने से पहले कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई न की जाए।
संघ ने अपने ज्ञापन में कहा है कि प्राकृतिक आपदा से संबंधित आर्थिक सहायता मामलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार पीठासीन अधिकारी के पास होता है। रीडर और अन्य लिपिकों की भूमिका केवल दस्तावेज प्रस्तुत करने और रिकॉर्ड संधारित करने तक सीमित रहती है। ऐसे में केवल दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले कर्मचारियों को आरोपी बनाना उचित नहीं है।
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं रोकी गई और कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा नहीं मिली तो जिले के सभी राजस्व लिपिक सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे, जिससे राजस्व विभाग का कामकाज प्रभावित हो सकता है।
गौरतलब है कि जांच में सामने आया है कि बिलासपुर में सर्पदंश से मौत के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये का मुआवजा जारी किया गया। विधानसभा में मामला उठने के बाद सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे। अब तक इस प्रकरण में डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील कर्मचारियों सहित 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।











