मोदी सरकार 3.0 का पहला बड़ा फेरबदल! कई मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा तेज

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की संभावनाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार मंत्रिमंडल का विस्तार करने के साथ-साथ कई मंत्रालयों का पुनर्गठन भी कर सकती है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज
सूत्रों के मुताबिक, संभावित फेरबदल में कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, जबकि कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियां कम होने या उन्हें बाहर किए जाने की भी चर्चा है। माना जा रहा है कि सरकार प्रदर्शन और राजनीतिक जरूरतों के आधार पर नई टीम तैयार कर सकती है।
कब हो सकता है फैसला
मंत्रिमंडल विस्तार की संभावित तारीखों को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। राष्ट्रपति के कार्यक्रम, विदेशी नेताओं की प्रस्तावित भारत यात्रा और प्रधानमंत्री के विदेश दौरों को देखते हुए 5 जुलाई या 11 जुलाई के बाद किसी भी समय विस्तार संभव माना जा रहा है। यदि उस दौरान फैसला नहीं होता है तो 20 जुलाई से पहले संभावित मानसून सत्र से पूर्व भी कैबिनेट विस्तार किया जा सकता है।
चुनावी राज्यों पर विशेष नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिन राज्यों में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां के नेताओं को मंत्रिमंडल में प्राथमिकता दी जा सकती है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात, गोवा, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे राज्यों के नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर चुनावी समीकरण साधने की कोशिश की जा सकती है।
सामाजिक संतुलन पर रहेगा जोर
बताया जा रहा है कि इस बार महिलाओं, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति-जनजाति समुदाय और युवा नेताओं को अधिक अवसर मिल सकते हैं। भाजपा संगठन में हाल के बदलावों की तर्ज पर सरकार भी सामाजिक संतुलन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे विभिन्न वर्गों के बीच राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा सकती है।
कुछ वरिष्ठ नेताओं की हो सकती है विदाई
सूत्रों के अनुसार, उम्र और प्रदर्शन के आधार पर कुछ वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। खासकर 75 वर्ष की आयु के करीब पहुंच चुके नेताओं की भूमिका में बदलाव की चर्चा है। इसके जरिए अनुभवी और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जा सकता है।











