Meta का बड़ा दांव: बिजनेस अकाउंट्स के लिए GPT-Claude आधारित चैटबॉट्स पर बढ़ेगा खर्च

Meta के स्वामित्व वाले इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp ने नए प्राइसिंग मॉडल मॉडल को पेश किया है, जो ChatGPT और Claude जैसे प्रतिद्वंद्वी एआई मॉडल के चैटबॉट्स का इस्तेमाल बिजनेस अकाउंट्स के लिए काफी महंगा बना देगा. इसका मतलब ये है कि अगर कोई भी व्हाट्सऐप बिजनेस अकाउंट वाला व्यक्ति इन थर्ड पार्टी ऐप्स के एआई मॉडल का इस्तेमाल करता है तो उन्हें ऐसा करना काफी महंगा पड़ सकता है. 1 अक्टूबर से थर्ड पार्टी मॉडल्स के व्हाट्सएप पर एआई कंर्वजेशन की लागत Meta AI की तुलना में बिजनेस अकाउंट्स के लिए लगभग दोगुनी हो सकती है. फिलहाल व्हाट्सऐप अभी एआई एजेंट्स के इस्तेमाल के लिए कोई शुल्क नहीं लेता है.

इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, 1 जुलाई को जारी WhatsApp के अपडेटेड डेवलपर डॉक्यूमेंटेशन पर आधारित एक सैंपल कैलकुलेटर से पता चला कि दूसरे बॉट्स से चलने वाले कॉम्प्लेक्स इंटरैक्शन के लिए बिजनेस अकाउंट्स को 10,000 मैसेज पर 968 डॉलर (लगभग 92285 रुपए) तक का खर्च आ सकता है (यह टोकन के इस्तेमाल पर निर्भर करता है), जबकि Meta AI का इस्तेमाल करने पर 400 डॉलर (लगभग 38134 रुपए) से 500 डॉलर (लगभग 47668 रुपए) का खर्च आएगा.

बड़ी कंपनियों को करना होगा मूल्यांकन

जानकारों का कहना है कि इस कदम से उन बिज़नेस पार्टनर्स को नुकसान हो सकता है जिन्होंने Claude, GPT, Mistral, Qwen और Kimi जैसे मॉडल्स का इस्तेमाल कर चैटबॉट्स बनाए हैं. एंटरप्राइज़ मैसेजिंग स्टार्टअप Fyno के को-फाउंडर अनिकेत जैन ने कहा, कीमत में यह अंतर कोई डिस्काउंट नहीं है, यह अपना मॉडल चुनने की सजा है. यह उन भारतीय स्टार्टअप्स को सजा देता है जिन्होंने बेहतरीन मॉडल्स का इस्तेमाल कर अपना बिज़नेस बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि इससे कुछ क्लाइंट्स पूरी तरह से WhatsApp छोड़ने का फैसला कर सकते हैं

टोकन सिस्टम से बढ़ सकता है बिल

कंपनियों की एक और चिंता यह है कि टोकन-बेस्ड प्राइसिंग की वजह से कभी-कभी बिल का अचानक बढ़ जाना (बिल शॉक) जैसी स्थिति बन जाती है, क्योंकि इस्तेमाल का पहले से अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. क्लेवरटैप (CleverTap) ने कहा, टोकन-बेस्ड प्राइसिंग के लिए सही गवर्नेंस की जरूरत है. एक साधारण क्वेरी और एक लंबी, जटिल बातचीत की लागत में बहुत अंतर हो सकता है, इसलिए ब्रांड्स को यह पता होना चाहिए कि इस्तेमाल कितना हो रहा है, खर्च के अलर्ट क्या हैं, फॉलबैक नियम और रूटिंग लॉजिक क्या हैं. साथ ही, उन्हें यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि ऑटोमेशन कब वाकई मददगार है और कब साधारण वर्कफ़्लो बेहतर है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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