7 जिले की 2 करोड़ आबादी… बिहार में रैपिड रेल चलने से किन लोगों को फायदा होगा?

बिहार में पहली बार रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) यानी रैपिड रेल चलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य सरकार ने 31.59 करोड़ रुपये की लागत से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराने को मंजूरी दी है. इसके तहत पटना को केंद्र में रखकर चार बड़े कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे. हालांकि, इस परियोजना के सामने सबसे बड़ा सवाल फंड का है. आइए इस खबर के आसरे ये समझने की कोशिश करते हैं रैपिड रेल की जरूरत क्यों होती है. पूर्व में जहां पर ये बनी है उसका क्या रिस्पॉन्स रहा है और बिहार के नजरिए से ये कितना जरूरी है?
रैपिड रेल सामान्य ट्रेन या मेट्रो से अलग होती है. मेट्रो शहर के अंदर चलती है, जबकि RRTS एक शहर को उसके आसपास के बड़े शहरों से जोड़ती है. इसे खासतौर पर रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बनाया जाता है. इसकी औसत रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा और अधिकतम गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है.
इसका सबसे बड़ा फायदा समय की बचत है. उदाहरण के लिए, जो सफर सड़क से 2 से 3 घंटे में पूरा होता है, वही रैपिड रेल से करीब 45 से 50 मिनट में तय किया जा सकता है. यही वजह है कि नीति आयोग और NCRTC जैसी संस्थाएं इसे भविष्य के शहरी परिवहन का अहम मॉडल मानती हैं.
बिहार में किन-किन शहरों को मिलेगा फायदा?
सरकार ने फिलहाल चार कॉरिडोर प्रस्तावित किए हैं
- पटना-गया जी: धार्मिक पर्यटन और दक्षिण बिहार की बेहतर कनेक्टिविटी.
- पटना-बेगूसराय: औद्योगिक क्षेत्र को राजधानी से तेज संपर्क.
- पटना-हाजीपुर-सोनपुर-मुजफ्फरपुर: उत्तर बिहार के सबसे व्यस्त रूट पर तेज परिवहन.
- पटना-आरा: पश्चिमी बिहार और भोजपुर क्षेत्र की बेहतर कनेक्टिविटी.
इन चारों रूट पर बड़ी संख्या में लोग रोजाना नौकरी, पढ़ाई और कारोबार के लिए सफर करते हैं. रैपिड रेल शुरू होने पर उनका सफर काफी छोटा हो जाएगा.











